नई दिल्ली/ब्यूरो: केंद्र सरकार ने देश की युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने और ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए एक निर्णायक युद्ध का ऐलान किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि 31 मार्च से पूरे देश में ड्रग्स के खिलाफ एक सघन तीन साल का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य भारत को ‘ड्रग फ्री’ बनाना और सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाना है।
तीन साल का खाका: रणनीति और कार्यान्वयन
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं होगा, बल्कि इसके तहत त्रि-स्तरीय रणनीति पर काम किया जाएगा:
- सप्लाई चैन को तोड़ना: एनसीबी (NCB) और राज्य पुलिस की टीमें मिलकर नशीले पदार्थों के स्रोतों और वितरण केंद्रों पर सर्जिकल स्ट्राइक करेंगी।
- संस्थागत ढांचा: अगले तीन वर्षों में जिला स्तर पर विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो सीधे तौर पर गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करेगी।
- तकनीकी निगरानी: तस्करों के नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सर्विलांस उपकरणों का उपयोग किया गया है।
‘युवाओं को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता’: अमित शाह
एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ड्रग्स न केवल किसी व्यक्ति को खत्म करता है, बल्कि पूरे परिवार और देश की सुरक्षा को खतरे में डालता है।
“हमारी सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्वों को बख्शेगी नहीं। यह तीन साल का अभियान नशे के विरुद्ध एक ‘जन आंदोलन’ होगा। हम युवाओं को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और इसके लिए कड़े से कड़े कानून लागू किए जाएंगे।” — अमित शाह, गृह मंत्री
पुनर्वास और जन-जागरूकता पर जोर
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नशे की लत के शिकार हो चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है:
- नशा मुक्ति केंद्र: सरकार देश भर में हजारों नए और आधुनिक पुनर्वास केंद्रों (Rehabilitation Centers) की स्थापना करेगी।
- शिक्षा और स्कूल: स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में नशे के दुष्प्रभावों को शामिल किया जाएगा ताकि किशोरों को शुरुआत से ही जागरूक किया जा सके।
- सामुदायिक भागीदारी: पंचायतों और स्थानीय समुदायों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा ताकि गांव-गांव तक सूचना पहुंच सके।
सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
गृह मंत्री ने संकेत दिया कि ड्रग्स का पैसा अक्सर आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होता है (नार्को-टेररिज्म)। इसलिए, सीमाओं पर बीएसएफ (BSF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को विशेष प्रशिक्षण और अधिकार दिए गए हैं। पड़ोसी देशों से होने वाली घुसपैठ और समुद्री रास्तों से आने वाली ड्रग्स की खेप को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है।
निष्कर्ष: 2029 तक लक्ष्य की प्राप्ति
इस तीन साल के अभियान के साथ केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक भारत में ड्रग्स के प्रचलन को न्यूनतम स्तर पर लाया जाए। सरकार ने साफ कर दिया है कि ‘नशामुक्त भारत’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है।





