Top 5 This Week

Related Posts

नवी पिल्लई को नोबेल मिलने पर सरकार की चुप्पी से भड़के शशि थरूर, सोशल मीडिया पर खुद घिरे

नई दिल्ली। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद भारत सरकार की ओर से बधाई संदेश नहीं आने का मुद्दा राजनीतिक विवाद बन गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस मामले में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उसकी चुप्पी को निंदनीय बताया। हालांकि, उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

थरूर ने सरकार पर उठाए सवाल

शशि थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिले छह दिन बीत चुके हैं, लेकिन भारत सरकार ने उन्हें बधाई तक नहीं दी। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भारतीय मूल की इतनी असाधारण महिला की उपलब्धि को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

थरूर ने अपनी पोस्ट के साथ एक एआई से तैयार वीडियो भी साझा किया, जिसमें नवी पिल्लई के संघर्ष और उनके कानूनी करियर को दिखाया गया है।

रंगभेद के खिलाफ संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक

नवी पिल्लई का जन्म वर्ष 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनके पूर्वज भारत से श्रीलंका होते हुए दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे। गरीबी और रंगभेद के माहौल में पली-बढ़ीं पिल्लई ने कानून की पढ़ाई की और वर्ष 1995 में दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय की पहली अश्वेत महिला न्यायाधीश बनीं।

उन्होंने रंगभेद विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों के अधिकारों की पैरवी की और संयुक्त राष्ट्र के रवांडा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह वर्ष 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रहीं।

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने में योगदान के लिए 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया।

सोशल मीडिया पर थरूर को भी घेरा

थरूर की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनकी आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि उनकी अपनी पार्टी ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया है। वहीं, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी थरूर की टिप्पणी पर सवाल उठाए।

सिब्बल ने तर्क दिया कि नवी पिल्लई ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान भारत की आलोचना की थी। ऐसे में केवल भारतीय मूल का होने के आधार पर सरकार से बधाई की अपेक्षा को लेकर बहस हो सकती है।

इस घटनाक्रम ने नवी पिल्लई के नोबेल सम्मान के साथ-साथ भारत सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों के रुख को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

Popular Articles