नई दिल्ली: लोकसभा में नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) के मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद देश की सियासत गरमा गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद को खत्म करने के सरकार के प्रयासों पर दिए गए बयान और कांग्रेस पर लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने गृह मंत्री के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि संसद चर्चा और संवाद का मंच है, न कि एकतरफा प्रोपेगैंडा फैलाने का। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में मिली सफलताओं का श्रेय सुरक्षा बलों के बलिदान और वीरता को मिलना चाहिए, न कि किसी मंत्री या सरकार को।
अमित शाह के आरोप: “छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने नक्सलियों को दिया संरक्षण”
लोकसभा में नक्सलवाद पर नियम 193 के तहत हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए, गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसकी सरकार ने नक्सलियों को संरक्षण दिया, जिससे राज्य में नक्सली गतिविधियां बढ़ीं। शाह ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान गठित ‘राष्ट्रीय सलाहकार परिषद’ (एनएसी – National Advisory Council) नक्सल समर्थकों से भरी हुई थी, जिसने सरकार की नीतियों को प्रभावित किया और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को कमज़ोर किया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: “सुरक्षा बलों के बलिदान का अपमान”
गृह मंत्री के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए, कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि अमित शाह का बयान सुरक्षा बलों के बलिदान और वीरता का अपमान है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई एक राष्ट्रीय मुद्दा है, और इसमें सुरक्षा बलों ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा की है। टैगोर ने कहा कि गृह मंत्री को राजनीतिक लाभ के लिए सुरक्षा बलों के काम का श्रेय लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए थे, और अमित शाह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
संसद में बहस: एकतरफा प्रोपेगैंडा या राष्ट्रीय सुरक्षा?
मणिकम टैगोर ने गृह मंत्री के बयान को ‘एकतरफा प्रोपेगैंडा’ बताते हुए कहा कि संसद में सभी दलों को अपने विचार रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय, केवल अपनी सरकार की तारीफ की और विपक्ष पर आरोप लगाए। टैगोर ने कहा कि नक्सलवाद एक जटिल समस्या है, और इसका समाधान केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करे, ताकि युवाओं को नक्सलवाद के रास्ते पर जाने से रोका जा सके।
नक्सलवाद पर संसद में हुई यह बहस और उसके बाद गरमाई सियासत देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी सियासत के केंद्र में रहने की संभावना है।





