Wednesday, March 4, 2026

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नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में वनाग्नि का तांडव थमा: वायुसेना के ‘बम्बी बकेट’ ऑपरेशन ने बुझाई आग; दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों को बचाया

चमोली/जोशीमठ: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध नंदा देवी क्षेत्र के जंगलों में भड़की भीषण आग पर भारतीय वायुसेना ने सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। पिछले कुछ दिनों से दुर्गम पहाड़ियों पर धधक रही इस आग ने क्षेत्र की दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया था। विकट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जब स्थानीय वन विभाग और प्रशासन के लिए आग पर नियंत्रण पाना असंभव होने लगा, तब केंद्र सरकार के निर्देश पर भारतीय वायुसेना को मैदान में उतारा गया। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘बम्बी बकेट’ (Bambi Bucket) तकनीक का उपयोग कर आकाश से हजारों लीटर पानी बरसाया और आग को रिहायशी इलाकों एवं संरक्षित वन क्षेत्रों में फैलने से रोक दिया।

वायुसेना का साहसिक ऑपरेशन: कैसे पाया काबू?

नंदा देवी जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऑपरेशन चलाना वायुसेना के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था:

  • हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल: वायुसेना ने अपने शक्तिशाली Mi-17 V5 हेलीकॉप्टरों को इस मिशन में लगाया।
  • जलाशयों से भरा पानी: हेलीकॉप्टरों ने पास की झीलों और नदियों से बम्बी बकेट के जरिए पानी भरा और धुआं उगलती पहाड़ियों पर सटीक बौछारें कीं।
  • दुर्गम इलाके की चुनौती: आग अत्यधिक ऊंचाई और संकरी घाटियों में लगी थी, जहाँ तेज हवाओं और कम दृश्यता (Visibility) के बीच उड़ान भरना बेहद जोखिम भरा था।

बड़ा प्राकृतिक नुकसान होने से टला

नंदा देवी क्षेत्र यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, इसलिए यहाँ की आग बुझाना वैश्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण था:

  1. दुर्लभ वनस्पतियों की सुरक्षा: इस क्षेत्र में कई बेशकीमती जड़ी-बूटियां और पेड़ मौजूद हैं। आग पर समय रहते काबू न पाने से ये हमेशा के लिए नष्ट हो सकते थे।
  2. वन्यजीवों का बचाव: यह क्षेत्र कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ और भालू जैसे जीवों का प्राकृतिक आवास है। वायुसेना की त्वरित कार्रवाई से इन जीवों को सुरक्षित गलियारा मिल सका।
  3. ग्लेशियरों पर प्रभाव: पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि आग लंबे समय तक जारी रहती, तो कार्बन (Black Carbon) जमा होने से पास के ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती थी।

वन विभाग और प्रशासन की सतर्कता

आग पर काबू पाने के बाद अब प्रशासन ‘पोस्ट-फायर’ मॉनिटरिंग (निगरानी) कर रहा है:

  • स्काई वॉच: वन विभाग की टीमें अभी भी सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए ‘हॉटस्पॉट्स’ पर नजर रख रही हैं ताकि आग दोबारा न भड़क सके।
  • ग्राउंड टीमें: पैदल गश्ती दल उन क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं जहाँ अभी भी हल्का धुआं उठ रहा है, ताकि जमीन के भीतर दबी आग को पूरी तरह ठंडा किया जा सके।

निष्कर्ष: समन्वय से मिली सफलता

मुख्यमंत्री ने इस सफल ऑपरेशन के लिए वायुसेना और स्थानीय प्रशासन की सराहना की है। उन्होंने कहा कि समय पर वायुसेना की मदद मिलने से एक बड़ी त्रासदी को रोका जा सका है। हालांकि, विशेषज्ञों ने भविष्य के लिए वनाग्नि की पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि हिमालय के इस संवेदनशील हिस्से को सुरक्षित रखा जा सके।

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