डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट में खुलासा – रेत और धूल से बढ़ रहा स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर खतरा
नई दिल्ली। हवा में घुलती धूल अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह एक वैश्विक संकट का रूप ले चुकी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हर साल वातावरण में 200 करोड़ टन धूल प्रवेश कर रही है, जिससे दुनियाभर में 380 करोड़ लोग प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से कई लोग लगातार वर्षों तक इस खतरनाक धूल के संपर्क में रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है।
यह रिपोर्ट 12 जुलाई को ‘रेत और धूल के तूफानों से मुकाबले के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर जारी की गई। इस दिवस की शुरुआत 2023 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने की थी ताकि इन प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
मिस्र के पिरामिड जितना भारी संकट
रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल करीब 200 करोड़ टन धूल वातावरण में मिल रही है, जिसका भार मिस्र के गीजा स्थित 307 पिरामिडों के कुल वजन के बराबर है। यह धूल हवा की गुणवत्ता, कृषि उत्पादकता, मानव स्वास्थ्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
150 देशों में असर, 33 करोड़ लोग सीधे प्रभावित
डब्ल्यूएमओ के अनुसार, रेत और धूल भरी आंधियों का प्रभाव दुनिया के 150 से अधिक देशों में महसूस किया जा रहा है, जिसमें 33 करोड़ लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। वर्ष 2024 में भले ही धूल की औसत मात्रा 2023 के मुकाबले कम रही हो, लेकिन इसका क्षेत्रीय प्रभाव कहीं अधिक घातक रहा।
कहां से आती है इतनी धूल?
रिपोर्ट बताती है कि वातावरण में पहुंचने वाली 80% से अधिक धूल उत्तर अफ्रीका और मध्य पूर्व के रेगिस्तानों से आती है, जो हवा के जरिए हजारों किलोमीटर दूर तक फैल जाती है।
गंभीर स्वास्थ्य संकट
डब्ल्यूएमओ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साझा आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच 380 करोड़ लोग धूल के खतरनाक स्तर के संपर्क में आए। यह आंकड़ा 2003-2007 की तुलना में 31% अधिक है। कुछ इलाकों में लोग पांच वर्षों में 1,600 से अधिक दिनों तक धूल के प्रभाव में रहे।
लैंसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट केवल अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक है और श्वसन रोगों, हृदय रोगों, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा रहा है।
आर्थिक नुकसान भी भयावह
एक अमेरिकी अध्ययन के अनुसार, 2017 में अमेरिका को ही धूल और वायु कटाव से 154 अरब डॉलर का नुकसान हुआ — जो 1995 की तुलना में चार गुना अधिक है।
वैश्विक तूफानों का असर
2024 में आए प्रमुख धूल तूफानों में स्पेन के कैनरी द्वीप, पूर्वी एशिया के 14 तूफान और मंगोलिया से उठे धूल के गुबार शामिल रहे। बीजिंग में एक तूफान के दौरान पीएम10 का स्तर 1,000 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक पहुंच गया, जिससे दृश्यता घटकर मात्र एक किलोमीटर रह गई।
समाधान की ओर कदम
डब्ल्यूएमओ ने इस रिपोर्ट के माध्यम से वैश्विक नीति निर्माताओं से आग्रह किया है कि वे रेत और धूल के तूफानों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाएं, वैज्ञानिक समाधान खोजें और सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में पर्यावरणीय सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
यह संकट अब अनदेखा नहीं किया जा सकता — क्योंकि यह हवा में फैले एक अदृश्य, लेकिन घातक दुश्मन की तरह, दुनिया की सांसों पर भारी पड़ रहा है।





