देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद शासन ने इन कर्मचारियों के मानदेय (Honorarium) में वृद्धि का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य महंगाई के दौर में अल्प मानदेय पर काम कर रहे कर्मियों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। वित्त विभाग और संबंधित मंत्रालयों द्वारा मंजूरी मिलने के बाद अब कर्मचारियों के बैंक खातों में बढ़ा हुआ वेतन क्रेडिट किया जाएगा। इस फैसले से विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी विभागों में तैनात हजारों ग्राउंड-लेवल कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
किन कर्मियों को मिलेगा इस बढ़ोतरी का लाभ?
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मानदेय वृद्धि का लाभ मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों को मिलेगा:
- आउटसोर्स कर्मचारी: विभिन्न सरकारी संस्थानों में बाह्य स्रोतों के माध्यम से तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी।
- संविदा कर्मी: स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे आपातकालीन विभागों में अनुबंध पर काम कर रहे तकनीकी विशेषज्ञ और सहायक।
- अतिथि शिक्षक और प्रेरक: शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले अतिथि शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय ढांचे में भी सुधार के संकेत दिए गए हैं।
कितनी हुई बढ़ोतरी और कब से होगी लागू?
शासन द्वारा जारी किए गए आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- प्रतिशत वृद्धि: अलग-अलग श्रेणियों के लिए मानदेय में 10% से 25% तक की वृद्धि की गई है।
- न्यूनतम वेतन सुनिश्चित: सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी का मानदेय राज्य द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम न हो।
- तत्काल प्रभाव: यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा और कर्मचारियों को चालू वित्तीय माह से ही बढ़ा हुआ लाभ मिलने लगेगा।
मुख्यमंत्री का विजन: ‘सशक्त कर्मचारी, सशक्त उत्तराखंड’
इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य के विकास में अंतिम छोर पर खड़े कर्मचारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
- कर्मचारी कल्याण प्राथमिकता: सरकार का मानना है कि यदि कर्मचारी आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस करेंगे, तभी वे पूरी निष्ठा से जनता की सेवा कर पाएंगे।
- पुरानी मांग पूरी: विभिन्न कर्मचारी संगठन लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे, जिसे सरकार ने बजट सत्र के बाद प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया है।
मानदेय में इस बढ़ोतरी से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय भार जरूर पड़ेगा, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनहित और कर्मचारी कल्याण के लिए वह प्रतिबद्ध है। यह कदम आगामी निकाय और पंचायत चुनावों से पहले सरकार की ‘प्रो-वर्कर’ (कर्मचारी समर्थक) छवि को और मजबूत करेगा। कर्मचारियों ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।





