देहरादून (24 मार्च, 2026): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत ने आम जनता और छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। गैस की इस किल्लत का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर दिखाई देने लगा है, जिससे शहर के ढाबों और सड़क किनारे लगने वाली ठेलियों पर मिलने वाली रोटी की कीमतों में भारी उछाल आया है। सिलिंडर की आंच धीमी पड़ने के कारण अब “गरीब की थाली” से रोटी महंगी होती जा रही है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए बाहर खाना खाना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
थाली पर संकट: 7-8 रुपये वाली रोटी अब 15 रुपये की हुई
गैस संकट के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि का विवरण इस प्रकार है:
- कीमतों में भारी वृद्धि: देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित ढाबों और ठेलियों पर मिलने वाली रोटी के दामों में लगभग शत-प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
- पुराने बनाम नए दाम: जहां कुछ समय पहले तक ढाबों और ठेलियों पर एक सामान्य रोटी सात से आठ रुपये में आसानी से मिल जाती थी, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 12 से 15 रुपये तक पहुंच गई है.
- आम आदमी पर बोझ: दिहाड़ी मजदूरों और बाहर रहकर काम करने वाले युवाओं के लिए, जो मुख्य रूप से इन ठेलियों और ढाबों पर निर्भर रहते हैं, भोजन का खर्च वहन करना अब मुश्किल हो गया है.
गैस किल्लत: ढाबा संचालकों की मजबूरी और बढ़ता दबाव
शहर के छोटे व्यापारियों और ढाबा संचालकों का कहना है कि वे मजबूरन दाम बढ़ा रहे हैं:
- ब्लैक में गैस की खरीद: संचालकों का आरोप है कि कमर्शियल गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति न होने के कारण उन्हें ऊंचे दामों पर या “ब्लैक” में सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।
- लागत में इजाफा: गैस के साथ-साथ अन्य खाद्य सामग्रियों के बढ़ते दामों ने उनकी लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिससे पुरानी कीमतों पर भोजन परोसना अब घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
- कम होती ग्राहक संख्या: रोटियों के दाम बढ़ने के कारण ढाबों पर आने वाले ग्राहकों की संख्या में भी कमी आई है, जिससे छोटे कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।





