देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कों पर आज तिब्बती समुदाय का जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे और वहां हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरोध में सैकड़ों तिब्बती शरणार्थियों ने विशाल विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी का परेड ग्राउंड और कचहरी परिसर ‘फ्री तिब्बत’ (Free Tibet) और ‘चीन तिब्बत छोड़ो’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इस प्रदर्शन के जरिए तिब्बती समुदाय ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए बीजिंग की दमनकारी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की।
सड़कों पर उतरा जनसैलाब: शांतिपूर्ण लेकिन आक्रामक विरोध
प्रदर्शन की शुरुआत सुबह देहरादून के विभिन्न तिब्बती बस्तियों (क्लेमेंट टाउन, राजपुर और सहस्रधारा रोड) से हुए मार्च के साथ हुई:
- हाथों में झंडे और तख्तियां: प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तिब्बत का राष्ट्रीय झंडा और ऐसी तख्तियां लिए हुए थे, जिन पर चीन द्वारा तिब्बत में की जा रही सांस्कृतिक और धार्मिक घेराबंदी के खिलाफ स्लोगन लिखे थे।
- शहीदों को श्रद्धांजलि: प्रदर्शन के दौरान उन तिब्बतियों को भी याद किया गया जिन्होंने तिब्बत की आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति दी है।
- बौद्ध भिक्षुओं की भागीदारी: इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, महिलाएं और युवा शामिल हुए, जो चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ एकजुट दिखे।
प्रमुख मांगें: ‘सांस्कृतिक पहचान पर खतरा’
तिब्बती नेताओं ने संबोधन के दौरान चीन सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और भारत सरकार सहित विश्व समुदाय के सामने अपनी मांगें रखीं:
- धार्मिक स्वतंत्रता की बहाली: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चीन तिब्बत के मठों और धार्मिक गुरुओं पर पाबंदियां लगाकर उनकी सदियों पुरानी संस्कृति को मिटाने की कोशिश कर रहा है।
- मानवाधिकारों का हनन: आरोप लगाया गया कि तिब्बत के भीतर विरोध करने वाली आवाजों को सैन्य बल के दम पर दबाया जा रहा है और वहां के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है।
- अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप: समुदाय ने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र (UN) तिब्बत के मुद्दे पर चुप्पी तोड़े और चीन पर दबाव बनाए कि वह तिब्बतियों को उनके अधिकार वापस दे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रदर्शन के मद्देनजर देहरादून पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
- रूट डायवर्जन: प्रदर्शन के कारण राजपुर रोड और कचहरी के आसपास के क्षेत्रों में यातायात को डायवर्ट किया गया ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
- निगरानी: शहर के संवेदनशील चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और खुफिया विभाग की टीमें भी स्थिति पर नजर बनाए रखीं।





