देहरादुनवासियों को आज थोड़ी देर के लिए अचानक बजने वाले इमरजेंसी सायरन से चौंकने की जरूरत नहीं है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की ओर से मंगलवार को शहर में आपदा प्रबंधन अभ्यास के तहत अलग-अलग जगहों पर सायरन बजाए जाएंगे। इसका उद्देश्य लोगों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए सजग और तैयार करना है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद शहर में 13 जगह आधुनिक लंबी दूरी तक आवाज पहुंचाने वाले सायरन स्थापित किए गए हैं। इनमें चार सायरन की आवाज 16 और नौ सायरन की आवाज आठ किलोमीटर तक सुनी जा सकती है। मुख्यमंत्री डानलवाला थाने में शाम छह बजे उद्घाटन करेंगे।
जिलाधिकारी सोनिका ने बताया कि यह अभ्यास पूरी तरह से पूर्व निर्धारित योजना का हिस्सा है। राजधानी में भूकंप, बाढ़ या किसी अन्य आपदा के दौरान अलर्ट सिस्टम को परखने और आम जनता को जागरूक करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने अपील की कि जब सायरन की आवाज सुनाई दे, तो लोग बिल्कुल न घबराएं। यह केवल एक मॉक ड्रिल है।
जानकारी के अनुसार, आज इमरजेंसी सायरन घंटाघर, परेड ग्राउंड, आईएसबीटी, बल्लूपुर चौक, रेलवे स्टेशन और सहस्रधारा रोड समेत कई प्रमुख स्थानों पर बजेंगे। प्रशासन की ओर से पहले ही इस बारे में स्थानीय लोगों को अवगत करा दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के लिए समय-समय पर ऐसे अभ्यास जरूरी हैं। इसके जरिए न केवल अलर्ट सिस्टम की तकनीकी जांच हो पाती है, बल्कि लोगों को भी यह समझने में मदद मिलती है कि आपदा के वक्त उन्हें क्या करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे भूकंपीय और आपदाग्रस्त राज्य में इस तरह की तैयारियां बेहद अहम हैं। आपदा के समय शुरुआती चेतावनी तंत्र (Early Warning System) हजारों जिंदगियां बचा सकता है।
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे सायरन बजने पर अफवाहों से बचें और इसे लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी न फैलाएं।





