देहरादून (25 मार्च, 2026): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इन दिनों रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की भारी किल्लत देखी जा रही है, जिससे आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट के बीच, प्रदेश सरकार ने अब पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को एक मजबूत और टिकाऊ विकल्प के रूप में बढ़ावा देने की कवायद तेज कर दी है। आने वाले दिनों में शहर के हजारों घरों को सीधे पीएनजी नेटवर्क से जोड़ने की व्यापक तैयारी है, ताकि उपभोक्ताओं को सिलेंडरों की बुकिंग और डिलीवरी के झंझट से मुक्ति मिल सके। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को गति देने के कड़े निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव का एक्शन: पीएनजी कनेक्शन तेज करने के निर्देश
एलपीजी संकट के समाधान के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की:
- समीक्षा बैठक: मुख्य सचिव ने गैस आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की और एलपीजी सिलेंडरों की कमी पर चिंता व्यक्त की।
- अधिकारियों को निर्देश: उन्होंने संबंधित विभागों (जैसे शहरी विकास, लोक निर्माण विभाग और गेल गैस) के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पीएनजी पाइपलाइन बिछाने और नए कनेक्शन देने के काम में तेजी लाई जाए।
- समयसीमा तय: मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए ताकि जल्द से जल्द अधिक से अधिक परिवारों को इसका लाभ मिल सके।
गेल गैस की तैयारियां: बारिश से पहले गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य
मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद, देहरादून में पीएनजी नेटवर्क बिछाने की जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी गेल गैस (GAIL Gas) ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं:
- कार्य में तेजी: गेल गैस ने शहर के विभिन्न इलाकों में पाइपलाइन बिछाने के काम को तेज कर दिया है और अतिरिक्त कार्यबल (Manpower) तैनात किया है।
- हजारों घरों का लक्ष्य: कंपनी का लक्ष्य आने वाले कुछ ही दिनों में हजारों नए घरों को पीएनजी नेटवर्क से जोड़ना है। इसके लिए उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जहां गैस बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पहले से मौजूद है।
- मानसून से पहले का टारगेट: गेल गैस के अधिकारियों के अनुसार, कंपनी का मुख्य लक्ष्य आगामी मानसून (बारिश) का सीजन शुरू होने से पहले अधिक से अधिक घरों तक पीएनजी की सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि बारिश के दौरान काम में बाधा न आए।





