Sunday, November 30, 2025

Top 5 This Week

Related Posts

देहरादून: उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील घोषित

देहरादून। भूकंप संभावित क्षेत्रों की नई वर्गीकरण प्रक्रिया के तहत उत्तराखंड को अब ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में शामिल किए जाने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों और भू-वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार राज्य में आने वाले वर्षों में भूकंपीय गतिविधियों का खतरा और अधिक बढ़ सकता है। इसी कारण उत्तराखंड को भूकंप जोन-6 में शामिल करने की सिफारिश की गई है, जो देश में सबसे ऊंची जोखिम श्रेणी मानी जाती है।

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक बनावट और सक्रिय भूकंपीय फॉल्ट लाइनों के कारण यहां बड़े भूकंप की संभावना लगातार बनी रहती है। हाल के महीनों में कई बार हल्के झटके महसूस किए गए हैं, जिसने सरकार और विशेषज्ञ संस्थानों को सतर्क कर दिया है। वैज्ञानिक बताते हैं कि उत्तराखंड लंबे समय से ‘सीसमिक गैप’ क्षेत्र माना जाता है, जहां भविष्य में तीव्र भूकंप आने की आशंका अधिक है।

इसके मद्देनज़र, राज्य में भूकंप मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में सेंसरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि भूकंप की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाया जा सके। इसके साथ ही ऐसे क्षेत्रों में सायरन भी लगाए जाएंगे, जो किसी भी भूकंपीय गतिविधि की स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी करेंगे।

सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति और जनसंख्या घनत्व को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को और आधुनिक बनाना जरूरी है। जल्दी चेतावनी मिलने से नुकसान कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। विभाग के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि लोग भूकंप के दौरान सुरक्षित रहने के उपायों को समझ सकें।

विशेषज्ञों की मानें तो यदि राज्य को जोन-6 में शामिल किया जाता है, तो निर्माण मानकों और भवन सुरक्षा नियमों में भी बदलाव अनिवार्य हो जाएगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि सार्वजनिक और निजी निर्माण कार्यों में सख्त भूकंप-रोधी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड में बढ़ते भूकंपीय जोखिम को देखते हुए सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और आपदा प्रबंधन एजेंसियां मिलकर तैयारियों को मजबूत करने में जुट गई हैं, ताकि किसी भी संभावित आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।

Popular Articles