Monday, January 12, 2026

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देश का सबसे महंगा तलाक! जोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बू को देने होंगे 14,000 करोड़ के बॉन्ड; कोर्ट ने दिया संपत्ति के बंटवारे का आदेश

चेन्नई/ब्यूरो: दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनी ‘जोहो’ (Zoho) के संस्थापक और पद्म श्री से सम्मानित श्रीधर वेम्बू एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी और कानूनी विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। ताजा अदालती आदेश के अनुसार, श्रीधर वेम्बू को अपनी पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के साथ चल रहे तलाक के मामले में लगभग 14,000 करोड़ रुपये मूल्य के बॉन्ड और शेयर जमा करने होंगे। इसे भारतीय इतिहास का अब तक का सबसे महंगा तलाक निपटारा (Divorce Settlement) माना जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

श्रीधर वेम्बू और उनकी पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के बीच विवाद पिछले कई वर्षों से चल रहा है। प्रमिला ने अमेरिका की एक अदालत में श्रीधर पर गंभीर आरोप लगाए थे:

  • शेयरों की हेराफेरी: प्रमिला का आरोप है कि श्रीधर ने उनकी जानकारी के बिना जोहो कॉरपोरेशन के शेयरों को अपने परिवार के अन्य सदस्यों के नाम ट्रांसफर कर दिया, ताकि तलाक की स्थिति में उन्हें कम संपत्ति देनी पड़े।
  • परित्याग का आरोप: प्रमिला ने दावा किया कि श्रीधर ने उन्हें और उनके विशेष जरूरतों वाले (Special Needs) बेटे को अमेरिका में छोड़ दिया और भारत आकर अकेले रहने लगे।

अदालत का सख्त आदेश

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, अदालत ने प्रमिला के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए यह अंतरिम निर्देश जारी किया है।

  • 14,000 करोड़ के बॉन्ड: कोर्ट ने श्रीधर वेम्बू को आदेश दिया है कि वे अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा, जो लगभग 14,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड और इक्विटी के रूप में है, सुरक्षा के तौर पर जमा करें या हस्तांतरित करें।
  • संपत्ति का मूल्यांकन: जोहो एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जिसकी वैल्यूएशन अरबों डॉलर में है। अदालत इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि कंपनी की संपत्ति में पत्नी का कितना कानूनी हक बनता है।

श्रीधर वेम्बू का पक्ष

दूसरी ओर, श्रीधर वेम्बू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से स्पष्ट किया है कि:

  1. वित्तीय गड़बड़ी से इनकार: उन्होंने कभी भी शेयरों का अवैध हस्तांतरण नहीं किया है।
  2. पारिवारिक कलह: उन्होंने अपनी पत्नी के आरोपों को आधारहीन बताया और कहा कि वे अपने बेटे की देखभाल के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं। उन्होंने इस विवाद के पीछे कुछ पारिवारिक सदस्यों की साजिश का भी अंदेशा जताया है।

कॉरपोरेट जगत पर असर

श्रीधर वेम्बू को उनकी सादगी और ग्रामीण इलाकों में टेक हब बनाने के लिए जाना जाता है। इस विवाद ने निवेशकों और कॉरपोरेट विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है क्योंकि:

  • होल्डिंग स्ट्रक्चर: इस विवाद से जोहो कॉरपोरेशन के मालिकाना हक (Ownership) और भविष्य के निर्णयों पर असर पड़ सकता है।
  • मिसाल: यह मामला भारत में कॉरपोरेट उत्तराधिकार और वैवाहिक संपत्ति के अधिकारों के लिए एक बड़ी नजीर बन सकता है।

निष्कर्ष: न्याय की प्रतीक्षा

14,000 करोड़ रुपये की यह भारी-भरकम राशि भारतीय स्टार्टअप और टेक जगत के किसी भी संस्थापक द्वारा दिए जाने वाले अब तक के सबसे बड़े हर्जाने के रूप में देखी जा रही है। वर्तमान में मामला अदालत के अधीन है और अंतिम फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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