ऋषिकेश: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती से हुंकार भरते हुए भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संदेश दिया। ऋषिकेश में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान शाह ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने इस पवित्र मंदिर को 16 बार तोड़ा और लूटा, लेकिन वे भारत की आस्था को मिटाने में विफल रहे। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज सोमनाथ को तोड़ने वालों का नामोनिशान इतिहास से मिट चुका है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश अपनी विरासत का ‘स्वाभिमान वर्ष’ मना रहा है। शाह ने जोर देकर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और काशी-विश्वनाथ धाम का पुनरुद्धार इस बात का प्रमाण है कि अब भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है।
शाह के संबोधन के मुख्य अंश: सोमनाथ से अयोध्या तक का सफर
गृह मंत्री ने भारतीय इतिहास की घटनाओं को वर्तमान के गौरव से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- इतिहास की सीख: अमित शाह ने कहा, “इतिहास गवाह है कि सोमनाथ मंदिर पर 16 बार प्रहार किए गए। हर बार इसे मिट्टी में मिलाने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार यह मंदिर और अधिक भव्यता के साथ खड़ा हुआ।”
- गुम हुए विध्वंसक: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने भारत की संस्कृति को नष्ट करने का अहंकार पाला था, आज वे इतिहास की गलियों में खो गए हैं, जबकि सनातन धर्म आज भी अडिग और जीवंत है।
- सांस्कृतिक स्वाभिमान: शाह के अनुसार, 2024-25 का वर्ष भारत के लिए केवल एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि ‘सांस्कृतिक स्वाभिमान’ का कालखंड है, जहाँ सोमनाथ से लेकर केदारनाथ तक का कायाकल्प हो रहा है।
देवभूमि उत्तराखंड: आध्यात्मिक चेतना का केंद्र
अमित शाह ने उत्तराखंड की भूमिका को राष्ट्र निर्माण के लिए अपरिहार्य बताया:
- शक्ति का स्रोत: उन्होंने कहा कि ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे स्थान भारत की आध्यात्मिक शक्ति के केंद्र हैं, जो पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोते हैं।
- धामी सरकार की सराहना: गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करते हुए कहा कि ‘युवा मुख्यमंत्री’ के नेतृत्व में उत्तराखंड न केवल बुनियादी ढांचे में, बल्कि अपनी धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा में भी नंबर-1 बन रहा है।
- सीमा सुरक्षा और आस्था: उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा और मंदिरों का संरक्षण, दोनों ही मोदी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
राजनीतिक संदेश और भविष्य का संकल्प
शाह के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ को और धार देने के रूप में देखा जा रहा है:
- विपक्ष पर प्रहार: गृह मंत्री ने बिना नाम लिए उन शक्तियों पर निशाना साधा जो भारत के इतिहास को केवल ‘गुलामी का कालखंड’ बताती रही हैं। उन्होंने कहा कि अब भारत अपनी शर्तों पर अपना इतिहास लिख रहा है।
- युवाओं से आह्वान: उन्होंने युवाओं से अपनी परंपराओं पर गर्व करने और विकसित भारत के संकल्प में भागीदार बनने की अपील की।
अमित शाह की यह ‘दहाड़’ स्पष्ट करती है कि आगामी समय में केंद्र सरकार का पूरा ध्यान विकास के साथ-साथ ‘सांस्कृतिक विरासत’ के संरक्षण पर रहेगा। सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि भारत की आस्था को कोई भी बाहरी ताकत स्थाई चोट नहीं पहुँचा सकती। ऋषिकेश से निकला यह संदेश आने वाले दिनों में देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में गहरी छाप छोड़ेगा।





