Saturday, January 31, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

देवभूमि में ‘छोटा अमरनाथ’ की डगर होगी आसान: 17 करोड़ रुपये से संवरेगा व्यास घाटी का मार्ग; श्रद्धालुओं को मिलेंगी अत्याधुनिक सुविधाएं

पिथौरागढ़/देहरादून: उत्तराखंड की व्यास घाटी में स्थित ‘छोटा अमरनाथ’ (तिमरैण गुफा) के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार ने इस दुर्गम तीर्थ स्थल की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए 17 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है। इस बजट के माध्यम से पैदल मार्ग के सुदृढ़ीकरण से लेकर यात्रियों के ठहरने और बुनियादी सुविधाओं के विकास तक कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे। पर्यटन विभाग का लक्ष्य है कि ‘छोटा अमरनाथ’ को केदारनाथ और बदरीनाथ की तर्ज पर एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

प्रमुख विकास कार्य: क्या-क्या बदलेगा?

17 करोड़ रुपये के इस मास्टर प्लान के तहत व्यास घाटी के इस दुर्गम इलाके में निम्नलिखित सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा:

  • पैदल मार्ग का सुदृढ़ीकरण: गुफा तक पहुँचने वाले कठिन और पथरीले रास्तों को सुधारा जाएगा। खड़ी चढ़ाई वाली जगहों पर रेलिंग लगाई जाएगी और मार्ग को चौड़ा किया जाएगा ताकि यात्री बिना किसी डर के चल सकें।
  • यात्री विश्राम गृह: रास्ते में श्रद्धालुओं के रुकने के लिए इको-फ्रेंडली हट और विश्राम गृहों का निर्माण किया जाएगा।
  • बुनियादी सुविधाएं: पीने के पानी की व्यवस्था, बायो-टॉयलेट्स और आपातकालीन चिकित्सा सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
  • सूचना केंद्र और साइनेज: पर्यटकों की सुविधा के लिए मार्ग पर दिशा-सूचक बोर्ड और तीर्थ की महत्ता बताने वाले सूचना केंद्र बनाए जाएंगे।

क्यों कहा जाता है इसे ‘छोटा अमरनाथ’?

पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील के अंतर्गत आने वाली इस प्राकृतिक गुफा में सर्दियों के दौरान बर्फ का एक विशाल शिवलिंग प्राकृतिक रूप से निर्मित होता है।

  1. अमरनाथ जैसी आकृति: इस हिम शिवलिंग की आकृति कश्मीर के प्रसिद्ध अमरनाथ गुफा के शिवलिंग के समान होती है, जिसके कारण स्थानीय लोग और श्रद्धालु इसे ‘छोटा अमरनाथ’ कहते हैं।
  2. धार्मिक मान्यता: व्यास घाटी में स्थित होने के कारण इस स्थान का पौराणिक महत्व भी बहुत अधिक है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

सरकार के इस कदम से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा होगी, बल्कि सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भी सुधार आने की उम्मीद है।

  • होमस्टे योजना: सरकार स्थानीय ग्रामीणों को अपने घरों को ‘होमस्टे’ में बदलने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जिससे तीर्थयात्रियों को स्थानीय संस्कृति और भोजन का अनुभव मिलेगा।
  • गाइड और पोर्टर: पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड और पोर्टर के रूप में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

प्रशासनिक तैयारी और समय सीमा

जिला प्रशासन ने विकास कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया (Tendering) शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। प्रयास यह है कि अगली यात्रा शुरू होने से पहले मुख्य बुनियादी ढांचे का काम पूरा कर लिया जाए।

“छोटा अमरनाथ हमारी धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ व्यास घाटी की पहचान भी है। 17 करोड़ रुपये की इस राशि से हम यह सुनिश्चित करेंगे कि श्रद्धालुओं को दुर्गम रास्तों पर कोई परेशानी न हो। यह निवेश सीमांत क्षेत्रों के विकास की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” — सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री, उत्तराखंड

यात्रा के लिए जरूरी सलाह

यह क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपना स्वास्थ्य परीक्षण जरूर कराएं और प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करें।

Popular Articles