देहरादून/पौड़ी: देश के दूसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान आज अपने गृह राज्य उत्तराखंड के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनके आगमन को लेकर राज्य प्रशासन और स्थानीय नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। जनरल चौहान का यह दौरा न केवल रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ाव के लिहाज से भी बेहद खास माना जा रहा है। उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट से लेकर उनके पैतृक गांव तक विशेष तैयारियां की गई हैं, जहाँ देवभूमि की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
सांस्कृतिक वैभव के साथ होगा अभिनंदन
जनरल अनिल चौहान के स्वागत को यादगार बनाने के लिए उत्तराखंड के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और नृत्यों की व्यवस्था की गई है:
- छोलिया और मशकबीन: उनके स्वागत समारोह में कुमाऊं और गढ़वाल के प्रसिद्ध छोलिया नर्तक अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, पहाड़ की पारंपरिक धुन ‘मशकबीन’ और ‘ढोल-दमाऊ’ की गूंज के साथ उनका अभिनंदन किया जाएगा।
- पुष्प वर्षा और तिलक: स्थानीय महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा और तिलक लगाकर सेनापति का स्वागत करने की योजना है।
दौरे के मुख्य पड़ाव और कार्यक्रम
सीडीएस जनरल अनिल चौहान का यह दौरा सैन्य और व्यक्तिगत, दोनों उद्देश्यों से प्रेरित है:
- सीमा सुरक्षा की समीक्षा: सूत्रों के अनुसार, सीडीएस उत्तराखंड से लगी चीन सीमा (LAC) की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले सकते हैं। वे अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाएंगे।
- पैतृक गांव का भ्रमण: जनरल चौहान अपने पैतृक गांव भी जा सकते हैं, जहाँ वे अपने कुलदेवता की पूजा-अर्चना करेंगे और ग्रामीणों से भेंट करेंगे।
- सैन्य संस्थानों का दौरा: उनके देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों पर जाने की भी संभावना है, जहाँ वे भविष्य के सैन्य अधिकारियों को संबोधित कर सकते हैं।
उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण
जनरल अनिल चौहान का पदभार संभालना उत्तराखंड के लिए गौरव की बात रही है, क्योंकि देश के दोनों सीडीएस (दिवंगत जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान) इसी मिट्टी से ताल्लुक रखते हैं:
- सैन्य बाहुल्य प्रदेश: उत्तराखंड को ‘वीरभूमि’ कहा जाता है, जहाँ के लगभग हर घर से एक सदस्य सेना में है। सीडीएस का आगमन यहाँ के युवाओं में सेना के प्रति जोश और प्रेरणा भरने का काम करेगा।
- अधिकारियों के साथ बैठक: वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी शिष्टाचार भेंट कर सकते हैं, जिसमें राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास पर चर्चा होने की उम्मीद है।





