देवप्रयाग/कीर्तिनगर (24 मार्च, 2026): टिहरी गढ़वाल जिले के देवप्रयाग मुख्य बाजार के निकट भुइट गांव में प्रस्तावित शराब के ठेके को हटाने की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह से जारी महिलाओं का शांतिपूर्ण आंदोलन सोमवार (23 मार्च) को हिंसक रूप ले लिया। आंदोलन के आठवें दिन, पुलिस ने क्रमिक अनशन पर बैठी बुजुर्ग महिलाओं पर जबरदस्त बल प्रयोग किया और उन्हें घसीटकर अनशन स्थल से जबरन हटा दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस की इस बर्बरतापूर्ण कार्रवाई में कई महिलाएं घायल हो गई हैं और क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है। तहसीलदार कीर्तिनगर और थाना प्रभारी देवप्रयाग की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई ने पुलिसिया कार्यप्रणाली और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब देवप्रयाग से आने वाली खबरों पर टिकी हैं, क्योंकि यह आंदोलन देवप्रयाग की पवित्रता और जनभावनाओं का एक बड़ा और सकारात्मक प्रतीक है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: शराब ठेके के खिलाफ एकजुट भुइट गांव
भुइट गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग पिछले आठ दिनों से प्रस्तावित शराब के ठेके के खिलाफ एकजुट हैं:
- ** शांतिपूर्ण अनशन:** भुइट गांव की महिलाएं देवप्रयाग मुख्य बाजार के निकट क्रमिक अनशन पर बैठी थीं। उनका आरोप है कि शराब का ठेका खुलने से क्षेत्र का माहौल खराब होगा और युवाओं पर इसका बुरा असर पड़ेगा। वे ठेके को निरस्त करने और क्षेत्र को शराब मुक्त घोषित करने की मांग कर रही थीं।
- जनभावनाओं का सम्मान: आंदोलनकारियों का कहना है कि देवप्रयाग एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ शराब का ठेका खोलना जनभावनाओं का अपमान है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करने और शराब के ठेके को तत्काल निरस्त करने की अपील की थी।
पुलिसिया बर्बरता: बल प्रयोग और बुजुर्ग महिलाओं को घसीटा
आंदोलन के आठवें दिन, पुलिस ने आंदोलनकारियों पर कड़ा रुख अपनाया:
- पुलिसिया अल्टीमेटम: तहसीलदार कीर्तिनगर प्रदीप कंडारी और थाना प्रभारी देवप्रयाग प्रशांत बहुगुणा ने अनशन स्थल पर पहुँचकर महिलाओं को कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पाँच सौ मीटर दूर चले जाने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वे ऐसा नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- आंदोलनकारियों का रुख: अनशनकारी महिलाओं ने कहा कि वे कोर्ट के आदेश का सम्मान करती हैं, लेकिन वे शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज करा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे न तो नारा लगा रही हैं और न ही उनका कोई झंडा-बैनर लगा है, इसलिए उन्हें अनशन स्थल से हटाने का कोई आधार नहीं है।
- बल प्रयोग: पुलिस ने आंदोलनकारियों की बात सुनने के बजाय, जबरदस्त बल प्रयोग किया। उन्होंने बुजुर्ग महिलाओं को घसीटकर अनशन स्थल से जबरन हटा दिया। इस बर्बरतापूर्ण कार्रवाई में कई महिलाएं घायल हो गई हैं और क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है।





