देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के बहुचर्चित मेस शुल्क घोटाले में शासन ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए कॉलेज के लेखाकार को निलंबित कर दिया है। जांच में लेखाकार की भूमिका को घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना गया है। मामले में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
करीब 80 लाख रुपये के मेस शुल्क घोटाले का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तरीय जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में मेस संचालन, भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के आधार पर लेखाकार की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उसके निलंबन के आदेश जारी किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि लंबे समय तक निगरानी और नियंत्रण में लापरवाही के कारण वित्तीय गड़बड़ियां होती रहीं। रिपोर्ट में कई प्रक्रियागत खामियों और नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। शासन अब मामले में अन्य संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। शासन स्तर पर जांच रिपोर्ट का परीक्षण जारी है और दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। मेस व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए वित्तीय निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।





