नई दिल्ली (13 मार्च, 2026): देशभर में दूध और डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता से हो रहे खिलवाड़ को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक नई एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब बिना वैध लाइसेंस के दूध का उत्पादन या बिक्री करना गैरकानूनी माना जाएगा। मिलावट की बढ़ती घटनाओं और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। अब छोटे डेयरी संचालकों से लेकर बड़े वितरकों तक, सभी के लिए पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है।
FSSAI की नई एडवाइजरी: लाइसेंस अनिवार्य, लापरवाही पर जेल
मिलावटखोरी के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए एफएसएसएआई ने सख्त नियम लागू किए हैं:
- अनिवार्य लाइसेंसिंग: अब कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना खाद्य सुरक्षा लाइसेंस के दूध का कारोबार नहीं कर पाएगी। यह नियम गांव के दुग्ध उत्पादकों और शहर के डेयरी बूथों, दोनों पर समान रूप से लागू होगा।
- सख्त दंड का प्रावधान: यदि कोई दुकानदार या डेयरी संचालक बिना लाइसेंस के दूध बेचता हुआ पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माने के साथ-साथ दुकान सील करने और जेल भेजने तक की कार्रवाई की जाएगी।
- नियमित ऑडिट: अब डेयरी फार्मों और चिलिंग सेंटरों का समय-समय पर ऑडिट किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दूध में यूरिया, डिटर्जेंट या सफेद रंग जैसी हानिकारक चीजें न मिलाई जा रही हों।
मिलावट की बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में देशभर से नकली दूध और सिंथेटिक पनीर की खबरें लगातार सामने आ रही थीं:
- त्योहारी सीजन की धांधली: जांच में पाया गया कि मांग बढ़ने पर कई जगह ‘केमिकल युक्त दूध’ की सप्लाई की जा रही थी, जो कैंसर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
- पैकेजिंग की जांच: खुले दूध के साथ-साथ अब ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट बंद दूध की सैंपलिंग भी तेज की जाएगी।
- कोल्ड चेन की मॉनिटरिंग: दूध के फटने या खराब होने से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अवैध प्रिजर्वेटिव्स (संरक्षक) पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
उपभोक्ताओं के लिए राहत: शुद्धता की गारंटी
इस कदम का उद्देश्य आम जनता को सुरक्षित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है:
- ट्रैकिंग सिस्टम: लाइसेंसिंग के माध्यम से प्रशासन के पास हर दूध विक्रेता का रिकॉर्ड होगा, जिससे किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
- जागरूकता अभियान: ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे केवल उन्हीं दुकानों से डेयरी उत्पाद खरीदें जिनके पास FSSAI का लाइसेंस नंबर प्रदर्शित हो।
- मोबाइल टेस्टिंग लैब: सरकार विभिन्न शहरों में ‘ऑन-द-स्पॉट’ टेस्टिंग के लिए मोबाइल लैब वैन तैनात करने की योजना बना रही है, जहां नागरिक खुद भी दूध की जांच करा सकेंगे।





