वॉशिंगटन: वैश्विक सैन्य शक्ति के समीकरणों को बदलने के लिए अमेरिकी वायुसेना अपने बेड़े में एक नया और विनाशकारी योद्धा शामिल करने की तैयारी कर रही है। इस लड़ाकू विमान को ‘F-47’ के नाम से जाना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि यह विमान न केवल वर्तमान के सबसे उन्नत विमानों (जैसे F-35 और F-22) से आगे है, बल्कि यह युद्ध के मैदान में अजेय रहने के लिए बनाया गया है। आइए जानते हैं कि आखिर F-47 में ऐसा क्या है जो इसे दुनिया का सबसे खूंखार हवाई शिकारी बनाता है।
अदृश्य होने की अद्भुत क्षमता (Next-Gen Stealth)
F-47 की सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘नेक्स्ट-जेनरेशन स्टेल्थ’ तकनीक है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुनिया का सबसे आधुनिक रडार सिस्टम भी इसे पकड़ने में नाकाम रहेगा। इसकी बॉडी पर इस्तेमाल किया गया विशेष ‘रडार एब्जॉर्बेंट मटेरियल’ (RAM) रेडियो तरंगों को सोख लेता है, जिससे यह दुश्मन की सीमा में घुसकर हमला करने और बिना भनक लगे वापस आने में सक्षम है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस ‘बिना पायलट का दिमाग’
F-47 केवल एक मशीन नहीं है, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित है। यह विमान पायलट के बिना भी जटिल मिशनों को अंजाम दे सकता है। इसमें मौजूद सेंसर और प्रोसेसर पलक झपकते ही हजारों डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण कर सकते हैं, जिससे यह दुश्मन की मिसाइलों को चकमा देने और खुद सटीक निशाना लगाने में माहिर है। इसे ‘लॉयल विंगमैन’ के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जहाँ एक पायलट वाला विमान कई बिना पायलट वाले F-47 को नियंत्रित कर सकेगा।
हाइपरसोनिक गति और घातक हथियार प्रणाली
इस लड़ाकू विमान की मारक क्षमता इसे अन्य विमानों से मीलों आगे खड़ा करती है:
- हाइपरसोनिक हथियार: F-47 ऐसी मिसाइलों से लैस है जो ध्वनि की गति से पांच गुना तेज वार करती हैं।
- लेजर गन: रिपोर्टों के अनुसार, इसमें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (लेजर गन) लगाने की भी तैयारी है, जो दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही भस्म कर सकती है।
- लंबी दूरी की मार: यह बिना ईंधन भरे हजारों किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है, जिससे अमेरिका अपनी धरती से बैठकर दुनिया के किसी भी कोने में स्ट्राइक कर पाएगा।
चीन और रूस के लिए बड़ी चुनौती
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि F-47 का निर्माण सीधे तौर पर चीन के J-20 और रूस के Su-57 को पछाड़ने के लिए किया गया है। छठे दौर (6th Generation) की इस तकनीक के आने के बाद हवाई युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। यह विमान ‘मल्टी-डोमेन’ ऑपरेशन में सक्षम है, यानी यह जमीन, हवा और अंतरिक्ष से आने वाले
अमेरिकी सेना में F-47 का शामिल होना केवल एक अपग्रेड नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है। यदि यह विमान अपनी उम्मीदों पर खरा उतरता है, तो भविष्य के युद्धों में आमने-सामने की भिड़ंत के बजाय तकनीकी वर्चस्व ही जीत का आधार बनेगा। फिलहाल इसकी सुरक्षा और गोपनीय परीक्षणों पर अमेरिका ने भारी बजट खर्च किया है।





