नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि अब दिल्ली में प्रवेश करने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों को पर्यावरण उपकर (ECC) देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने उन वाहनों को दी गई छूट भी खत्म कर दी है, जो अब तक आवश्यक वस्तुएं जैसे सब्जी, फल, अनाज, दूध, दवा और अन्य जरूरी सामान लेकर दिल्ली आते थे।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राजधानी की गंभीर होती प्रदूषण की समस्या को देखते हुए किसी भी वाहन को छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण डीजल से चलने वाले भारी वाहन हैं, और जब तक उन पर कड़ा नियंत्रण नहीं होगा, तब तक हालात सुधारना मुश्किल है।
पर्यावरण उपकर की वसूली से होने वाली आमदनी दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर खर्च की जाएगी। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि उपकर से जमा राशि के उपयोग पर हर तिमाही रिपोर्ट पेश की जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सीधे तौर पर मालवाहक वाहनों और व्यापार से जुड़े लोगों को प्रभावित करेगा। अब जरूरी वस्तुओं को लाने वाले वाहनों पर भी अतिरिक्त लागत बढ़ेगी, जिसका असर थोक और खुदरा बाजार तक पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा के कारण आम नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है। ऐसे में सरकारों और एजेंसियों को सख्त कदम उठाने ही होंगे। अदालत ने राज्यों से यह भी पूछा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक उठाए गए कदमों से कितना सुधार हुआ है।
गौरतलब है कि दिल्ली में पर्यावरण उपकर लगाने का फैसला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही 2015 में लिया था, जिसका उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना था। उस समय आवश्यक वस्तुओं को लाने वाले वाहनों को छूट दी गई थी, लेकिन अब अदालत ने इसे समाप्त कर दिया है।





