Saturday, February 14, 2026

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दिल्ली की वोटर लिस्ट पर सियासी संग्राम: ‘कांग्रेस और केजरीवाल ने घुसपैठियों को बनाया मतदाता’, भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का आरोप

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कांग्रेस और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि दोनों ने चुनावी फायदे के लिए अवैध घुसपैठियों को मतदाता बनाया। उन्होंने दावा किया कि यह रणनीति केवल सत्ता में बने रहने और चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई।
भाजपा का आरोप: ‘घुसपैठियों को वोटर बनाना तय फॉर्मूला’
सचदेवा ने कहा कि दिल्ली में विदेशी घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल कराने का काम कांग्रेस और अन्य दलों के सहयोग से किया गया। उनका आरोप है कि अरविंद केजरीवाल ने मुफ्त की योजनाओं और लुभावने वादों से एक खास वर्ग को दिल्ली की ओर आकर्षित किया और उन्हें मतदाता बनाकर चुनावी जीत का “फॉर्मूला” तैयार किया।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में बाहर से बड़ी संख्या में लोग वोट डालने आते हैं और चुनाव खत्म होते ही वापस लौट जाते हैं।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप

भाजपा का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनावों में वोटर लिस्ट में भारी अनियमितताएं सामने आई थीं। पार्टी ने दावा किया कि एक ही पते पर 60 से 100 तक मतदाता पंजीकृत थे। यहां तक कि फुटपाथों पर नकली घर नंबर डालकर अल्पसंख्यक वर्ग के लिए फर्जी वोट भी बनवाए गए।
सचदेवा ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग को 10 हजार पन्नों में विस्तृत शिकायत दी थी। भाजपा का आरोप है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में अचानक 13 लाख वोट बढ़ गए थे। इसी तरह 2020 के चुनाव से पहले भी 8 लाख से ज्यादा नए वोट जोड़े गए।

एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद
भाजपा नेता ने पूरे देश में एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया शुरू करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भाजपा दिल्ली की मतदाता सूची को व्यवस्थित कराने में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देगी।
हालांकि, कांग्रेस और कुछ अन्य दल इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। सचदेवा ने आरोप लगाया कि यह विरोध दरअसल उन विदेशी घुसपैठियों को बचाने के लिए किया जा रहा है जिन्हें अवैध तरीके से वोटर बनाया गया है।
क्या है नियम?
दिल्ली में नई मतदाता सूची 2002 की वोटर लिस्ट को आधार मानकर तैयार की जाएगी।
• जिनका नाम 2002 की सूची में पहले से दर्ज है, उन्हें केवल एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा।
• जिनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें अपने माता-पिता की वोटर आईडी का विवरण देना होगा।
• अन्य वर्गों के लिए चुनाव आयोग अलग प्रक्रिया तय करेगा।
राजनीतिक गरमी बढ़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी पहले बिहार की सभाओं में यही मुद्दा उठा चुके हैं। अब दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के बयान ने राजधानी की राजनीति में नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।
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