नई दिल्ली: भारत ने पिछले एक दशक में गरीबी उन्मूलन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। नीति आयोग द्वारा जारी हालिया आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के दौरान देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) के जाल से बाहर निकलने में सफल रहे हैं। सामाजिक सुरक्षा के व्यापक विस्तार और लक्षित सरकारी योजनाओं ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को सशक्त बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के मुख्य अंश
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में गरीबी की दर में सबसे तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि गरीबी अब केवल आय तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के मानकों में आए सुधार ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है।
इन योजनाओं ने रखी सशक्तिकरण की नींव
विशेषज्ञों का मानना है कि गरीबी में इस भारी कमी के पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और कल्याणकारी योजनाओं का बड़ा हाथ है:
- खाद्य सुरक्षा: ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ के तहत करोड़ों लोगों को मिल रहे मुफ्त राशन ने पोषण के स्तर को सुधारा है।
- आवास और स्वच्छता: ‘पीएम आवास योजना’ और ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के जरिए पक्के मकान और शौचालयों के निर्माण से जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आया है।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: ‘आयुष्मान भारत’ योजना ने गरीब परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए होने वाले भारी खर्च से बचाया है।
- वित्तीय समावेशन: ‘जन धन’ खातों के माध्यम से करोड़ों लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर बिचौलियों की भूमिका खत्म की गई है।
सामाजिक सुरक्षा के विस्तार का प्रभाव
सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे किसानों को पेंशन और बीमा योजनाओं से जोड़ा गया है। इससे समाज के वंचित वर्गों में भविष्य के प्रति सुरक्षा का भाव जागृत हुआ है। बुनियादी ढांचे जैसे बिजली, साफ पानी (जल जीवन मिशन) और एलपीजी कनेक्शन (उज्ज्वला योजना) के विस्तार ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भविष्य की राह
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना इस बात का प्रमाण है कि भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि इस गति को बनाए रखने के लिए कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि ये लोग दोबारा गरीबी की चपेट में न आएं।





