हैदराबाद/सिद्दीपेट: तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ कथित तौर पर एक साथ 100 से अधिक आवारा कुत्तों को जहर देकर मार डाला गया। इस सामूहिक हत्याकांड का आरोप गांव के सरपंच और स्थानीय अधिकारियों पर लगा है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की है और गांव के सरपंच समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि कुत्तों को मारने के बाद उनके शवों को गुप्त रूप से ठिकाने लगा दिया गया था, जिसकी तलाश के लिए अब पुलिस और प्रशासन की टीमें इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद इस वीभत्स घटना का खुलासा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है।
क्रूरता का खौफनाक मंजर: कैसे दिया वारदात को अंजाम?
प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी:
- भोजन में दिया गया जहर: आरोप है कि कुछ पेशेवर ‘डॉग कैचर्स’ को बुलाया गया जिन्होंने खाने के सामान में जहरीला पदार्थ मिलाकर कुत्तों को खिला दिया।
- सामूहिक हत्या: जहर खाने के कुछ ही देर बाद एक-एक कर कुत्तों ने दम तोड़ना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे गांव में कुत्तों के शव बिखरे पड़े थे।
- साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश: घटना के बाद आनन-फानन में जेसीबी मशीन बुलाकर मृत कुत्तों को एक गड्ढे में भरकर दबा दिया गया, ताकि किसी को इसकी भनक न लगे।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है:
- मुख्य आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने गांव के सरपंच, पंचायत सचिव और एक संविदा कर्मी को गिरफ्तार किया है। इन पर सामूहिक हत्या की साजिश रचने और आदेश देने का आरोप है।
- शवों की तलाश: पुलिस अब उस स्थान की पहचान करने की कोशिश कर रही है जहाँ इन बेजुबानों को दफनाया गया है। शवों को निकालकर उनका पोस्टमार्टम कराया जाएगा ताकि मौत के सही कारण और जहर के प्रकार का पता चल सके।
- धाराओं का प्रयोग: आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं में भारी रोष
इस घटना ने देश भर के पशु प्रेमियों को आंदोलित कर दिया है:
- कानून में बदलाव की मांग: कार्यकर्ताओं का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नसबंदी (Sterilization) है, न कि उनकी हत्या। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
- प्रशासनिक विफलता: यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग कानून हाथ में लेकर इस तरह की बर्बरता कैसे कर सकते हैं।
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या कई शहरों और गांवों में समस्या जरूर है, लेकिन तेलंगाना की यह घटना दर्शाती है कि समस्या के समाधान के नाम पर क्रूरता की हदें पार की जा रही हैं। यह मामला अब न केवल एक कानूनी लड़ाई बन गया है, बल्कि समाज के नैतिक मूल्यों पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। पुलिस की आगे की जांच में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।





