चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत के साथ ही विवाद भी खड़ा हो गया। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद संभालने के पहले ही दिन राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस को जन्म दे दिया। शपथ ग्रहण के बाद आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ गीत को लेकर उत्पन्न विवाद ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद आयोजित पहले सार्वजनिक समारोह में राज्य गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया था। इसी दौरान ‘वंदे मातरम्’ के प्रस्तुतीकरण को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच मतभेद सामने आए। कुछ समूहों ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय भावना को प्रमुखता देने की मांग की, जबकि अन्य पक्षों ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की रूपरेखा तय करते समय राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर स्पष्टता नहीं दिखाई गई। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान नहीं हुआ और विवाद को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के रूप में विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक अनुभव से अधिक राजनीतिक संतुलन बनाए रखना होगी। फिल्मी लोकप्रियता के सहारे सत्ता तक पहुंचे विजय अब ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जहां हर निर्णय का व्यापक राजनीतिक और वैचारिक अर्थ निकाला जाएगा।
राज्य में राष्ट्रवाद बनाम क्षेत्रीय पहचान की बहस नई नहीं है। दक्षिण भारत की राजनीति में सांस्कृतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। इसी पृष्ठभूमि में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर उठा यह विवाद और भी संवेदनशील माना जा रहा है।
इस बीच सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि कार्यक्रम का उद्देश्य सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करना था और किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं। प्रशासन ने कहा कि भविष्य के सरकारी आयोजनों में प्रोटोकॉल को और स्पष्ट किया जाएगा ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि तमिलनाडु में नई सरकार की दिशा और प्राथमिकताएं आने वाले दिनों में और स्पष्ट होंगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के पहले ही दिन शुरू हुआ यह विवाद संकेत दे रहा है कि राज्य की राजनीति आने वाले समय में वैचारिक बहसों से भरपूर रहने वाली है।





