Wednesday, March 4, 2026

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ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी: अब कमर्शियल वाहनों के लिए अनिवार्य होगा अलग लाइसेंस; जानें क्या होगी नई प्रक्रिया और इसके फायदे

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश की सड़कों को सुरक्षित बनाने और ड्राइवरों की दक्षता बढ़ाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की श्रेणियों में बड़े बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार, अब कमर्शियल (व्यावसायिक) वाहन चलाने के लिए ड्राइवरों को एक विशेष और अलग लाइसेंस बनवाना होगा। अब तक कई मामलों में ‘लाइट मोटर व्हीकल’ (LMV) लाइसेंस धारकों को कुछ श्रेणियों के कमर्शियल वाहन चलाने की छूट थी, लेकिन अब परिवहन मंत्रालय इसे और अधिक सख्त और श्रेणीबद्ध करने जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी और व्यावसायिक वाहन चलाने वाले ड्राइवर विशेष रूप से प्रशिक्षित और योग्य हों।

क्या है नया बदलाव और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

वर्तमान व्यवस्था में निजी कार चलाने वाले और हल्के कमर्शियल वाहन चलाने वालों के बीच कई बार प्रक्रिया समान होती थी। लेकिन नई नीति के तहत:

  • विशिष्ट प्रशिक्षण: कमर्शियल लाइसेंस पाने के लिए अब ड्राइवरों को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (DTC) से अनिवार्य प्रशिक्षण लेना होगा।
  • सड़क सुरक्षा: सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद सरकार ने पाया कि कमर्शियल वाहनों के संचालन के लिए अलग कौशल की आवश्यकता होती है, जिसे सामान्य लाइसेंस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता।
  • श्रेणियों का विस्तार: अब कमर्शियल श्रेणी के तहत भी हल्के, मध्यम और भारी वाहनों (HMV) के लिए अलग-अलग मानक तय किए जाएंगे।

क्या होगा नया प्रोसेस? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

नए नियमों के लागू होने के बाद कमर्शियल लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया कुछ इस तरह हो सकती है:

  1. अनिवार्य ट्रेनिंग: आवेदक को सबसे पहले किसी सरकारी या निजी मान्यता प्राप्त ड्राइविंग स्कूल से ट्रेनिंग सर्टिफिकेट हासिल करना होगा।
  2. चिकित्सा परीक्षण (Medical Test): कमर्शियल श्रेणी के लिए शारीरिक दक्षता और विशेष रूप से ‘आई टेस्ट’ (Eye Test) के कड़े मानक होंगे।
  3. ऑनलाइन आवेदन: सारथी (Sarathi) पोर्टल पर जाकर कमर्शियल श्रेणी का चयन करना होगा और ट्रेनिंग सर्टिफिकेट अपलोड करना होगा।
  4. कठिन ड्राइविंग टेस्ट: कमर्शियल वाहनों के लिए सिम्युलेटर और ट्रैक पर होने वाला ड्राइविंग टेस्ट अब निजी वाहनों के मुकाबले अधिक चुनौतीपूर्ण होगा।

लाइसेंस की वैधता और रिन्यूअल के नियम

  • कमर्शियल लाइसेंस: व्यावसायिक श्रेणी के लाइसेंस की वैधता आमतौर पर 5 साल के लिए होगी (खतरनाक सामान ले जाने वाले वाहनों के लिए यह कम हो सकती है)।
  • रिन्यूअल: रिन्यूअल के समय ड्राइवर को फिर से मेडिकल फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा।
  • निजी लाइसेंस: निजी वाहनों के लिए 20 साल या 40 वर्ष की आयु तक का नियम यथावत रह सकता है।

परिवहन विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ‘प्रोफेशनल ड्राइवरों’ की संख्या बढ़ेगी। इससे न केवल सड़क हादसों में कमी आएगी, बल्कि बीमा दावों (Insurance Claims) के निपटारे में भी स्पष्टता रहेगी क्योंकि अब ड्राइवर की योग्यता उसके लाइसेंस की श्रेणी से तुरंत पहचानी जा सकेगी।

निष्कर्ष: सुगम और सुरक्षित सफर की ओर कदम

मंत्रालय जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकता है। हालांकि, मौजूदा कमर्शियल लाइसेंस धारकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद ही उन्हें नई प्रक्रिया के तहत रिन्यूअल कराना होगा। यह बदलाव डिजिटल इंडिया और सड़क सुरक्षा के राष्ट्रीय मिशन को मजबूती प्रदान करेगा।

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