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डॉक्टर बनने का सपना 3 महीने दूर था, 90 लाख फीस के बाद एचओडी की रुपयों की मांग; तन्वी ने दी जान, विभागाध्यक्ष पर गंभीर आरोप

देहरादून (26 मार्च, 2026): उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बेहद ही हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां डॉक्टर बनने का सपना संजोए एक होनहार मेडिकल छात्रा ने कथित तौर पर विभागाध्यक्ष (HOD) के उत्पीड़न से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेस (SGRR) की एमएस (नेत्र रोग) की छात्रा तन्वी की मौत ने पूरे चिकित्सा जगत और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तन्वी का डॉक्टर बनने का सपना अब बस तीन महीने दूर था, जिसके लिए उसके परिवार ने ₹90 लाख की भारी-भरकम फीस जमा की थी। वर्षों की कड़ी मेहनत, समर्पण और परिवार की उम्मीदों के बीच, अंतिम पड़ाव पर पहुंची तन्वी की जिंदगी विभागाध्यक्ष द्वारा कथित तौर पर बनाए गए मानसिक और आर्थिक दबाव के कारण अचानक थम गई।

पिता के गंभीर आरोप: 90 लाख फीस के बाद भी एचओडी कर रही थी रुपयों की डिमांड

तन्वी के पिता, डॉ. ललित मोहन, ने कॉलेज की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका गुप्ता पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • मानसिक उत्पीड़न: डॉ. मोहन का कहना है कि डॉ. प्रियंका गुप्ता उनकी बेटी पर लगातार मानसिक दबाव बना रही थीं, जिससे तन्वी भीतर तक टूट चुकी थी।
  • आर्थिक अपेक्षा: उनका आरोप है कि भारी फीस जमा करने के बावजूद, विभागाध्यक्ष तन्वी से रुपयों की मांग (Economic Expectation) कर रही थी, जिसे पूरा करने में तन्वी असमर्थ थी।
  • अनुत्तीर्ण करने की धमकी: पिता का दावा है कि विभागाध्यक्ष द्वारा तन्वी को परीक्षा में अनुत्तीर्ण (Fail) करने की धमकी भी दी जा रही थी, जिससे तन्वी अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित थी।

तीन महीने की दूरी: परिवार ने की थी विभागाध्यक्ष से गुहार

डॉ. ललित मोहन ने बताया कि तन्वी का एमएस कोर्स पूरा होने में महज तीन महीने शेष थे:

  1. लगातार बढ़ता दबाव: अंतिम पड़ाव पर होने के बावजूद, विभागाध्यक्ष का दबाव कम होने के बजाय बढ़ता ही गया, जिसने तन्वी को डिप्रेशन (Depression) में धकेल दिया।
  2. तीन बार मुलाकात: ललित मोहन ने आरोप लगाया कि वह पिछले चार महीनों में तीन बार स्वयं विभागाध्यक्ष से मिले और उनसे हाथ जोड़कर अनुरोध किया कि वे उनकी बेटी का भविष्य प्रभावित न करें और उसे शांति से पढ़ाई करने दें।
  3. अनदेखी: पिता का कहना है कि विभागाध्यक्ष ने उनके अनुरोधों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया, जिससे तन्वी पर दबाव और बढ़ गया।

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