नई दिल्ली: भारत अपनी आबादी की गिनती के सदियों पुराने तरीके को पूरी तरह से बदलने और एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति की ओर बढ़ने के लिए तैयार है। देश की आगामी जनगणना अब पूरी तरह से ‘पेपरलेस’ (Paperless) और डिजिटल होगी, जहाँ घरों की दीवारों पर खड़िया, कोयले या गेरू से निशान लगाने और कागज़ के भारी-भरकम रजिस्टरों को भरने का दौर अब इतिहास बन जाएगा। भारत सरकार ने इस महाअभियान के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है, जिसमें मोबाइल ऐप, टैबलेट और हाई-टेक क्लाउड सर्वर (Cloud Servers) कागज़-कलम की जगह लेंगे। इस बार की जनगणना न केवल पर्यावरण के अनुकूल होगी, बल्कि एकत्रित किए गए संवेदनशील आँकड़ों की सुरक्षा के लिए एक बहुस्तरीय और अभेद्य साइबर कवच भी तैयार किया गया है, जो किसी भी प्रकार की हैकिंग या सेंधमारी से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।
कागज़ के पहाड़ों से मुक्ति: पर्यावरण संरक्षण की ओर एक बड़ा कदम
पिछली जनगणना (2011) के आँकड़े बताते हैं कि इस विशाल प्रक्रिया में लगभग 8577 मीट्रिक टन कागज़ और हज़ारों लीटर स्याही का इस्तेमाल हुआ था। कागज़ के इस पहाड़ों को तैयार करने, परिवहन करने, और फिर सुरक्षित रखने में न केवल भारी लागत आती थी, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक बड़ी चुनौती थी। आगामी डिजिटल जनगणना से कागज़ के इस भारी इस्तेमाल से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी, जो भारत सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ (Digital India) और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आँकड़ों को सीधे मोबाइल ऐप या टैबलेट के माध्यम से दर्ज किया जाएगा, जिससे समय और संसाधनों की भारी बचत होगी और जनगणना की प्रक्रिया अधिक कुशल और पारदर्शी बनेगी।
क्लाउड सर्वर और अभेद्य साइबर कवच: आँकड़ों की सर्वोच्च सुरक्षा
डिजिटल जनगणना में एकत्रित किए गए करोड़ों भारतीयों के संवेदनशील आँकड़ों की सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन आँकड़ों को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक हाई-टेक क्लाउड सर्वर का इस्तेमाल किया जाएगा, जो उन्नत एन्क्रिप्शन (Encryption) और सुरक्षा प्रोटोकॉल से लैस होंगे। सरकार ने आँकड़ों की सुरक्षा के लिए एक बहुस्तरीय साइबर कवच तैयार किया है, जिसमें फायरवॉल (Firewalls), इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (Intruision Detection Systems), और नियमित सुरक्षा ऑडिट शामिल हैं। यह अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि जनगणना के आँकड़े किसी भी प्रकार की हैकिंग, सेंधमारी, या अनधिकृत पहुँच से पूरी तरह सुरक्षित रहें। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के आँकड़ों का इस्तेमाल केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और नागरिकों की निजता का पूरी तरह से सम्मान किया जाएगा।
मोबाइल ऐप और टैबलेट: गणनाकारों के लिए आधुनिक उपकरण
आगामी जनगणना में डेटा संग्रह के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए मोबाइल ऐप और टैबलेट का इस्तेमाल किया जाएगा। गणनाकार इन आधुनिक उपकरणों के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित करेंगे और उसे सीधे सर्वर पर अपलोड करेंगे। मोबाइल ऐप में जीपीएस (GPS) और जिओ-फेंसिंग (Geo-fencing) जैसी सुविधाएँ भी होंगी, जिससे गणनाकारों की लोकेशन और काम की प्रगति पर नज़र रखी जा सकेगी। इससे जनगणना की प्रक्रिया अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगी और डेटा संग्रह में होने वाली गलतियों को कम किया जा सकेगा। सरकार ने गणनाकारों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन किया है, ताकि वे इन आधुनिक उपकरणों का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल कर सकें और जनगणना के कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।





