Tuesday, February 17, 2026

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ट्रंप के शांति प्रस्ताव को बड़ा झटका: गाजा पीस बोर्ड की बैठक से फ्रांस और इटली ने बनाई दूरी; यूरोप के 15 में से केवल 3 देश आने को हुए राजी

वाशिंगटन/पेरिस: मध्य पूर्व में शांति बहाली के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘गाजा पीस बोर्ड’ (Gaza Peace Board) की आगामी बैठक को लेकर यूरोपीय देशों के बीच भारी मतभेद उभर कर सामने आए हैं। ट्रंप प्रशासन के लिए इसे एक बड़े कूटनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि फ्रांस और इटली जैसे प्रमुख वैश्विक देशों ने इस बैठक से दूरी बना ली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, यूरोप के 15 महत्वपूर्ण देशों में से केवल 3 देशों ने ही इस बैठक में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी है। अधिकांश यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रंप का यह प्रस्ताव एकतरफा है और इसमें फिलिस्तीनी पक्ष की चिंताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

यूरोपीय देशों की बेरुखी: क्यों उठ रहे हैं सवाल?

फ्रांस, इटली और जर्मनी जैसे प्रभावशाली राष्ट्रों का रुख ट्रंप की इस पहल के खिलाफ काफी सख्त नजर आ रहा है:

  • फ्रांस का रुख: राष्ट्रपति मैक्रों के प्रशासन ने संकेत दिया है कि पेरिस ऐसी किसी भी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगा जो संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानकों और ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुरूप न हो।
  • इटली की असहमति: इटली ने भी स्पष्ट किया है कि वह गाजा के भविष्य पर होने वाली किसी भी चर्चा में तभी शामिल होगा जब इसमें सभी प्रमुख हितधारकों (Stakeholders) की समान भागीदारी सुनिश्चित होगी।
  • विभाजित यूरोप: यूरोप के 15 बड़े देशों में से केवल हंगरी, चेक रिपब्लिक और एक अन्य देश ने ही इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की है, जिससे यह शांति पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर पड़ती दिख रही है।

ट्रंप के ‘गाजा पीस बोर्ड’ का मुख्य विवाद क्या है?

डोनाल्ड ट्रंप का यह बोर्ड गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासन के लिए एक नया खाका पेश करता है, लेकिन इसमें कई विवादास्पद बिंदु हैं:

  1. एकतरफा नियंत्रण: आलोचकों का तर्क है कि यह बोर्ड पूरी तरह से इजरायली सुरक्षा चिंताओं पर केंद्रित है और गाजा के नागरिकों की राजनीतिक स्वायत्तता की अनदेखी करता है।
  2. यूरोपीय संघ की चिंता: यूरोपीय संघ (EU) का मानना है कि ट्रंप प्रशासन बिना किसी अंतरराष्ट्रीय सर्वसम्मति के गाजा पर अपनी शर्तें थोपना चाहता है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
  3. वित्तपोषण का मुद्दा: बोर्ड ने पुनर्निर्माण के लिए अरब और यूरोपीय देशों से भारी निवेश की उम्मीद की है, लेकिन कई देशों ने बिना किसी राजनीतिक गारंटी के धन देने से मना कर दिया है।

ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया: “विपक्ष केवल राजनीति कर रहा है”

इस कूटनीतिक विफलता पर व्हाइट हाउस ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जो देश इस बैठक से दूरी बना रहे हैं, वे गाजा में शांति के बजाय केवल राजनीति में रुचि रखते हैं:

  • ट्रंप का बयान: राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि उनकी टीम एक ‘डील’ तैयार कर रही है जो दशकों पुराने संघर्ष को खत्म कर देगी, लेकिन कुछ यूरोपीय नेता पुरानी और असफल नीतियों से चिपके रहना चाहते हैं।
  • रणनीतिक बदलाव: समर्थन में कमी को देखते हुए ट्रंप प्रशासन अब इजरायल और कुछ चुनिंदा अरब देशों के साथ मिलकर एक ‘छोटा गठबंधन’ (Limited Alliance) बनाने पर विचार कर रहा है।

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