नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए ताजा बयान के बाद वैश्विक कमोडिटी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल के दाम में जोरदार उछाल आया। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरा गई है। इसके चलते निवेशकों ने सोना और चांदी में मुनाफावसूली की, जिससे दोनों की कीमतों पर दबाव बना। विश्लेषकों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत पर भी पड़ सकता है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका है। इससे परिवहन लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर भी दबाव बन सकता है। वहीं, सोना-चांदी की कीमतों में आई गिरावट से निवेशकों और आभूषण खरीदारों को कुछ राहत मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका की आर्थिक नीतियों, ब्याज दरों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर कमोडिटी बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।





