देहरादून/नई दिल्ली। देश के रक्षा उत्पादन प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों ने मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से उनकी वेतन आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की गईं और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को भी अब तक बहाल नहीं किया गया है। इसी के विरोध में उन्होंने देशभर के विभिन्न शहरों में शांतिपूर्ण धरने और रैलियों का आयोजन किया।
प्रदर्शन में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) और रक्षा उत्पादन इकाइयों के कर्मचारी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे देश की सुरक्षा से जुड़ी इकाइयों में काम करते हैं—जहां टैंक, हथियार और गोला-बारूद का निर्माण किया जाता है—लेकिन सरकार उनकी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की अनदेखी कर रही है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा रक्षा कारखानों का कॉरपोरेटाइजेशन किए जाने के बाद से कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित हुई हैं। उन्हें स्थायी लाभों से वंचित किया जा रहा है, जबकि कार्यभार और जिम्मेदारी पहले से कई गुना बढ़ गई है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द सातवें वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करे और पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को सभी रक्षा उत्पादन कर्मचारियों के लिए बहाल करे। साथ ही, कॉरपोरेट मॉडल में लाई गई इकाइयों को फिर से सरकारी निगरानी में लाने की भी मांग की गई।
कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन को तेज करेंगे। उन्होंने कहा, “हम देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले कर्मचारी हैं, लेकिन सरकार हमारे भविष्य को असुरक्षित बना रही है। यह केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।”
इस बीच, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों पर विचार किया जा रहा है और मंत्रालय श्रमिक संगठनों के साथ संवाद के लिए तैयार है।
वेतन आयोग और पेंशन बहाली की मांग को लेकर उठी यह आवाज अब धीरे-धीरे अन्य केंद्रीय औद्योगिक इकाइयों तक भी पहुंच रही है, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।





