देहरादून में पुलिस ने एक चौंकाने वाला मामला उजागर किया है, जिसमें बांग्लादेश का रहने वाला युवक ममून हसन (28) टूरिस्ट वीजा पर भारत आकर एक स्थानीय महिला से प्रेम संबंध में पड़ गया और फिर अपनी पहचान बदलकर शहर में अवैध रूप से रहने लगा। मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, ममून की पहचान त्यूणी की रहने वाली रीना चौहान से फेसबुक पर हुई थी। 2019 में ममून टूरिस्ट वीजा पर पहली बार देहरादून आया और रीना के साथ दो महीने रहा। 2020 और 2021 में भी वह वीजा पर भारत आता रहा।
कोरोना काल में वीजा अवधि खत्म होने पर उसने रीना को भी अवैध तरीके से बांग्लादेश बॉर्डर पार करवाया और वहां उससे निकाह कर लिया।
निकाह के बाद दोनों बार-बार अवैध तरीके से भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पार करते रहे और देहरादून में पति-पत्नी के रूप में किराये के मकानों में रहने लगे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देहरादून में रहने के दौरान ममून ने फर्जी आधार कार्ड बनवाकर खुद का नाम रीना के पूर्व पति के नाम पर—सचिन चौहान रख लिया।
इसी फर्जी पहचान के आधार पर वह शहर के एक क्लब में बाउंसर की नौकरी भी करने लगा।
रीना ने स्वीकार किया कि उसने अपने परिचितों की मदद से ममून के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। वहीं वह खुद भी अलग स्थान पर किराये पर रह रही थी।
नेहरू कॉलोनी पुलिस और एलआईयू द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कालनेमि के तहत मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद सारा खेल सामने आ गया।
फर्जी दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य सामान पुलिस ने बरामद कर लिया है।
दोनों के खिलाफ
- अवैध तरीके से सीमा पार करने
- फर्जी दस्तावेज तैयार करने
के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी प्रकार की राष्ट्र-विरोधी गतिविधि इनके माध्यम से संचालित न हुई हो।
एसएसपी अजय सिंह के अनुसार, ऑपरेशन कालनेमि के तहत अब तक देहरादून जिले में अवैध रूप से रह रहे 16 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े जा चुके हैं।
- इनमें से 9 को वापस भेजा जा चुका है
- जबकि 7 विभिन्न अपराधों में लिप्त पाए जाने पर जेल भेजे जा चुके हैं
यह मामला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर अलार्म है कि बाहरी देशों से आए कुछ तत्व पहचान बदलकर शहर में न केवल रह रहे हैं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में रोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं।





