Wednesday, February 11, 2026

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टिहरी झील में अब आसमान से उतरेगा विमान: सी-प्लेन संचालन की राह हुई साफ; ‘स्काई हॉक’ कंपनी ने निवेश और संचालन में दिखाई दिलचस्पी

नई टिहरी: उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र पर टिहरी झील जल्द ही एक नए और रोमांचक अध्याय की शुरुआत करने जा रही है। झील में सी-प्लेन (Sea Plane) उतारने की योजना, जो लंबे समय से फाइलों में अटकी थी, अब धरातल पर उतरती दिख रही है। विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ‘स्काई हॉक’ (Sky Hawk) ने टिहरी झील में सी-प्लेन के संचालन और इससे जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने में गहरी रुचि दिखाई है। इस कदम से न केवल देहरादून और दिल्ली जैसे शहरों से टिहरी की दूरी मिनटों में सिमट जाएगी, बल्कि यह राज्य के पर्यटन क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

पर्यटन को लगेंगे पंख: क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

टिहरी झील में सी-प्लेन उतारने की योजना को केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत गति दी जा रही है:

  • सीधा संपर्क: सी-प्लेन के शुरू होने से पर्यटक सीधे देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट या दिल्ली से उड़ान भरकर टिहरी झील की लहरों पर उतर सकेंगे। इससे घंटों का सड़क सफर मात्र 20-30 मिनट में पूरा होगा।
  • वाटर एयरोड्रोम का विकास: स्काई हॉक कंपनी ने झील के किनारे जरूरी ‘वाटर एयरोड्रोम’ और टर्मिनल बनाने के लिए तकनीकी सर्वे की इच्छा जताई है।
  • एडवेंचर टूरिज्म: वाटर स्पोर्ट्स के बाद अब ‘एरो-स्पोर्ट्स’ और विमानन कनेक्टिविटी टिहरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेगी।

स्काई हॉक कंपनी का प्रस्ताव और प्रशासनिक तैयारी

विमानन कंपनी और शासन के बीच शुरुआती दौर की बातचीत सकारात्मक रही है:

  1. तकनीकी व्यवहार्यता: कंपनी के विशेषज्ञों की टीम जल्द ही टिहरी का दौरा कर झील के जलस्तर, हवा की गति और लैंडिंग जोन का बारीकी से निरीक्षण करेगी।
  2. सरकार का सहयोग: उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने स्पष्ट किया है कि कंपनी को लैंडिंग के लिए आवश्यक अनुमतियां और सुरक्षा संबंधी सहयोग प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा।
  3. रोजगार के अवसर: इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा और सत्कार (Hospitality) क्षेत्र में सैकड़ों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

चुनौतियां और सुरक्षा मानक

झील में विमान उतारना जितना रोमांचक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी:

  • पर्यावरण संतुलन: झील के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय के मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: चूंकि टिहरी झील एक संवेदनशील क्षेत्र है, इसलिए सुरक्षा और आपातकालीन रेस्क्यू टीमों की तैनाती पर भी चर्चा की जा रही है।

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