Sunday, November 30, 2025

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‘जोखिम घटाना बढ़ती मजबूरी’; आर्थिक चिंताओं पर विदेश मंत्री का UN में तीखा सवाल

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के विदेश मंत्री ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और इसके असर को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के देशों के लिए जोखिम घटाना अब बढ़ती मजबूरी बन चुका है। विदेश मंत्री ने अपने भाषण में बढ़ती महंगाई, व्यापार असंतुलन और ऊर्जा संकट जैसी वैश्विक समस्याओं के आयाम गिनाए और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र को सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

वैश्विक आर्थिक चिंता के आयाम
विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है—

  • ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में असमानता,
  • मुद्रा अस्थिरता और वित्तीय बाजार में अनिश्चितता,
  • विकसित और विकासशील देशों के बीच बढ़ती आर्थिक खाई।

उन्होंने चेताया कि यदि इन खतरों को समय रहते संबोधित नहीं किया गया, तो यह संकट सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

UN से किया तीखा सवाल
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र से सवाल किया कि वैश्विक आर्थिक असंतुलन और जोखिम घटाने के लिए संयुक्त प्रयास कब और कैसे होंगे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वैश्विक संस्थाओं का कर्तव्य है कि वे देशों के बीच सहयोग और नीति समन्वय को मजबूत करें ताकि वैश्विक संकट को नियंत्रण में रखा जा सके।

जोखिम घटाने की बढ़ती मजबूरी
उन्होंने कहा, “आज कोई भी देश अकेले इन आर्थिक और वित्तीय जोखिमों से नहीं निपट सकता। वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी, समझौते और समन्वय अब न सिर्फ विकल्प, बल्कि आवश्यक बन गए हैं।” विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि विकासशील देशों की जरूरतों को नजरअंदाज किए बिना स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकाले जाएं।

विशेषज्ञों का दृष्टिकोण
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भाषण वैश्विक आर्थिक असमानताओं के खिलाफ भारत की मजबूत और सक्रिय आवाज का प्रतीक है। इसके साथ ही यह संकेत भी देता है कि भारत बहुपक्षीय मंचों में अपने अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

आगे की राह
विदेश मंत्री ने अपने भाषण के अंत में कहा कि वैश्विक संस्थाओं और देशों को मिलकर न केवल आर्थिक अस्थिरता को नियंत्रित करना होगा, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भी ठोस कदम उठाने होंगे। उनका यह संदेश वैश्विक नेताओं के बीच आगामी बहुपक्षीय वार्ता और आर्थिक सहयोग के एजेंडे को प्रभावित कर सकता है।

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