Monday, February 9, 2026

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‘जीवन में कुछ भी सीधा नहीं होता, लचीले बनो और धैर्य रखो’: राहुल गांधी का ‘Gen Z’ को मूलमंत्र; युवाओं के साथ साझा किए सफलता के सूत्र

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज के दौर की युवा पीढ़ी यानी ‘जेन-जी’ (Gen Z) के साथ एक विशेष संवाद के दौरान सफलता और जीवन जीने के नजरिए पर गहरा संदेश दिया है। युवाओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आधुनिक दुनिया की भागदौड़ और तत्काल परिणामों की अपेक्षा के बीच ‘धैर्य और लचीलापन’ सबसे बड़े हथियार हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे जीवन के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय अपनी रणनीतियों में लचीलापन लाएं, क्योंकि सफलता का रास्ता कभी भी सीधा नहीं होता।

राहुल गांधी के संदेश के प्रमुख बिंदु: युवाओं के लिए क्या है खास?

राहुल गांधी ने अपने अनुभव साझा करते हुए तीन मुख्य बातों पर जोर दिया, जो आज के युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं:

  • लचीलापन (Flexibility): उन्होंने कहा कि अक्सर हम एक तय रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं, लेकिन स्थितियां हमेशा हमारे पक्ष में नहीं होतीं। ऐसे में खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालना और नए रास्तों को अपनाना ही बुद्धिमानी है।
  • धैर्य (Patience): राहुल गांधी ने रेखांकित किया कि ‘इंस्टेंट’ (तुरंत) के इस दौर में युवा बहुत जल्दी नतीजे चाहते हैं। उन्होंने सलाह दी कि बड़ी उपलब्धियों के लिए लंबे समय तक धैर्य बनाए रखना अनिवार्य है।
  • सीधा रास्ता एक भ्रम: उन्होंने स्पष्ट किया कि करियर हो या व्यक्तिगत जीवन, प्रगति कभी भी सीधी रेखा में नहीं होती। इसमें मोड़ और बाधाएं आएंगी, जिन्हें स्वीकार करना सीखना होगा।

Gen Z की चुनौतियों पर चर्चा

संवाद के दौरान राहुल गांधी ने आज के युवाओं के सामने मौजूद मानसिक और सामाजिक चुनौतियों पर भी अपनी राय रखी:

  1. असफलता का डर: उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलता को अंत न समझें, बल्कि इसे सीखने की एक प्रक्रिया के रूप में देखें।
  2. सोशल मीडिया का दबाव: उन्होंने माना कि डिजिटल युग में दूसरों से तुलना करने का दबाव युवाओं पर बहुत अधिक है, जिससे बचने के लिए खुद पर विश्वास रखना जरूरी है।
  3. सुनहरे भविष्य का निर्माण: राहुल ने युवाओं को प्रेरित किया कि वे केवल नौकरी पाने के पीछे न भागें, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नए और रचनात्मक विचारों पर काम करें।

संवाद का उद्देश्य: युवाओं से सीधा जुड़ाव

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी का यह संदेश उनकी उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे देश की सबसे युवा आबादी के साथ एक भावनात्मक और मानसिक जुड़ाव बनाना चाहते हैं। राजनीति से इतर एक ‘मेंटॉर’ (मार्गदर्शक) की भूमिका में उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोर रहा है।

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