नई दिल्ली, ब्यूरो। केंद्र सरकार ने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं, जिससे यह तय हो गया है कि प्रस्ताव संसद के निचले सदन (लोकसभा) में पेश किया जाएगा।
महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। सूत्रों के मुताबिक, अब तक कई सांसद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। अगर यह प्रस्ताव राज्यसभा में आता, तो 50 सांसदों के हस्ताक्षर पर्याप्त होते।
मानसून सत्र में पेश होगा प्रस्ताव
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में जानकारी दी थी कि यह प्रस्ताव 21 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, “यह भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है, इसमें राजनीति की कोई जगह नहीं है। सरकार इस पर विपक्षी दलों से भी सहयोग मांग रही है।”
दिल्ली आवास में मिली थी जली हुई नकदी
जस्टिस यशवंत वर्मा जब दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे, तब उनके सरकारी आवास में आग लगने की घटना के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष समिति की जांच में यह सामने आया था कि नकदी अवैध रूप से जमा की गई थी।
इसके बाद जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था। अब उनके खिलाफ महाभियोग लाकर संविधान के अनुच्छेद 124(4) के तहत हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव तय





