रामनगर/नैनीताल: उत्तराखंड के जंगलों में आदमखोर होते जा रहे बाघों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नैनीताल जिले के रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले जंगलों में एक बेहद वीभत्स घटना सामने आई है, जहाँ अपने साथियों के साथ जंगल में आग जलाकर बैठे एक युवक को बाघ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया। बाघ युवक को झाड़ियों में घसीटते हुए गहरे जंगल में ले गया और उसे अपना निवाला बना लिया। घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम ने इलाके में भारी सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद मृतक का केवल कटा हुआ सिर और शरीर के कुछ क्षत-विक्षत हिस्से ही बरामद हो सके। इस घटना के बाद से आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है।
कैसे हुआ यह खौफनाक हादसा?
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, घटना देर शाम की है जब युवक जंगल के सीमावर्ती क्षेत्र में मौजूद था:
- अचानक हमला: मृतक अपने कुछ साथियों के साथ ठंड से बचने के लिए आग जलाकर बैठा था। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे बाघ ने अचानक युवक पर हमला कर दिया।
- साथियों के सामने अपहरण: जब तक युवक के साथी कुछ समझ पाते या उसे बचाने की कोशिश करते, बाघ युवक की गर्दन दबोचकर उसे घने जंगलों की ओर खींच ले गया। साथियों ने शोर मचाकर बाघ को डराने की कोशिश की, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर बाघ ओझल हो गया।
- खोजबीन और बरामदगी: सुबह जब वन विभाग की टीम ने हाथियों और सशस्त्र गार्डों के साथ तलाशी शुरू की, तो घटनास्थल से कुछ दूरी पर युवक का सिर और हड्डियां बरामद हुईं।
वन विभाग की कार्रवाई और ग्रामीणों का आक्रोश
इस दर्दनाक मौत के बाद स्थानीय निवासियों में वन विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी देखी जा रही है:
- गश्त बढ़ाने की मांग: ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में बाघ की मूवमेंट लगातार देखी जा रही थी, लेकिन विभाग ने समय रहते पिंजरा नहीं लगाया।
- मुआवजे का आश्वासन: वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक के परिजनों को सरकारी नियमानुसार उचित मुआवजा देने और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने का आश्वासन दिया है।
- ट्रैप कैमरे: हमलावर बाघ की पहचान करने के लिए वन विभाग ने इलाके में कई ‘ट्रैप कैमरे’ लगा दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह बाघ आदमखोर हो चुका है।
पर्यटकों और ग्रामीणों के लिए चेतावनी
वन विभाग ने इस घटना के बाद एडवाइजरी जारी कर लोगों को सचेत किया है:
- जंगल में प्रवेश पर रोक: सूर्यास्त के बाद किसी भी स्थिति में जंगल या उसके आसपास न जाने की हिदायत दी गई है।
- आग से न बढ़ेगा भ्रम: विभाग ने स्पष्ट किया है कि अक्सर यह माना जाता है कि आग देखकर जानवर दूर भागते हैं, लेकिन कई बार जानवर कौतूहल या शिकार की तलाश में आग के करीब भी आ जाते हैं।
- अकेले न निकलें: ग्रामीणों को समूह में चलने और हाथ में डंडा व शोर करने वाले उपकरण रखने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष: दहशत के साये में ग्रामीण
इस घटना ने एक बार फिर इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को उजागर किया है। युवक का इस तरह शिकार होना यह दर्शाता है कि जंगल के किनारे रहने वाले लोगों के लिए खतरा कितना बढ़ गया है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस हमलावर बाघ को पकड़ने या उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर खदेड़ने की है, ताकि भविष्य में ऐसी कोई और अनहोनी न हो।





