रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों भ्रष्टाचार और कथित घोटालों को लेकर सियासी माहौल गरमाया हुआ है। राज्य की भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई है। सरकार का कहना है कि किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सुशासन और पारदर्शिता सरकार की प्राथमिकता है। इसी नीति के तहत प्रशासनिक व्यवस्था में निगरानी बढ़ाने, जांच एजेंसियों को सक्रिय करने और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि जनता के हितों से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वालों को किसी भी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
वहीं, विपक्ष लगातार सरकार को घेरने में जुटा है। कांग्रेस ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर सरकार से जवाब मांगा है। हाल के विधानसभा सत्रों में भी कई मामलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भ्रष्टाचार का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा अहम रहा है। आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए दोनों प्रमुख दल इस मुद्दे को जनता के बीच अपनी-अपनी रणनीति के साथ उठा रहे हैं। भाजपा जहां पारदर्शी शासन और कार्रवाई को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
राज्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकती है। सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे की असली परीक्षा उन मामलों में होगी, जहां आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।





