बीजिंग/यंगून: चीन ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई करते हुए म्यांमार के कुख्यात ‘मिंग गिरोह’ (Ming Family Syndicate) के 11 सदस्यों को फांसी की सजा दे दी है। इन अपराधियों पर मानव तस्करी, अपहरण, अवैध हिरासत और अरबों डॉलर के ऑनलाइन फ्रॉड नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप थे। चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इन गुर्गों को म्यांमार सीमा से गिरफ्तार कर चीन लाया गया था, जहाँ लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें मृत्युदंड दिया गया।
म्यांमार की सीमा से संचालित होता था आतंक का साम्राज्य
जांच में सामने आया है कि मिंग परिवार का यह गिरोह म्यांमार के उत्तरी क्षेत्र कोकांग (Kokang) से अपना नेटवर्क चला रहा था।
- साइबर पार्क का सच: इस गिरोह ने म्यांमार के जंगलों में बड़े-बड़े ‘साइबर पार्क’ बना रखे थे, जो वास्तव में आधुनिक जेलों की तरह थे। यहाँ हजारों लोगों को बंधक बनाकर रखा गया था।
- मानव तस्करी का जाल: दक्षिण-पूर्वी एशिया के विभिन्न देशों से युवाओं को ‘अच्छी नौकरी’ का झांसा देकर बुलाया जाता था और फिर उन्हें इन केंद्रों में बेच दिया जाता था।
- क्रूरता की हदें: जो बंधक ऑनलाइन धोखाधड़ी के काम में सहयोग नहीं करते थे, उन्हें शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी और फिरौती के लिए उनके परिजनों को धमकाया जाता था।
‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’: चीन और म्यांमार का साझा अभियान
इन अपराधियों की गिरफ्तारी चीन और म्यांमार की सेना के बीच हुए एक बड़े साझा ऑपरेशन का परिणाम थी।
- गिरोह के सरगना का अंत: गिरोह का मुख्य सरगना मिंग शुएचांग ने गिरफ्तारी के डर से पहले ही आत्महत्या कर ली थी, जबकि उसके परिवार के अन्य सदस्यों को चीन प्रत्यर्पित (Extradite) कर दिया गया था।
- हजारों बंधकों की रिहाई: इस कार्रवाई के दौरान म्यांमार के केंद्रों से करीब 40,000 से अधिक लोगों को मुक्त कराया गया, जिनमें अधिकांश चीनी नागरिक थे।
- हत्याकांड का बदला: चीनी मीडिया के अनुसार, इस गिरोह ने नवंबर 2023 में एक मुठभेड़ के दौरान चीन के कई अंडरकवर पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी थी, जिसके बाद बीजिंग ने इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म करने की कसम खाई थी।
चीन का सख्त संदेश: “कोई भी अपराधी सुरक्षित नहीं”
विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ 11 गुर्गों को फांसी पर लटकाना चीन का एक कड़ा कूटनीतिक और कानूनी संदेश है।
- जीरो टॉलरेंस: चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सीमाओं के बाहर बैठकर चीनी नागरिकों को निशाना बनाने वाले अपराधियों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ निकाला जाएगा।
- क्षेत्रीय प्रभाव: इस कार्रवाई के बाद कंबोडिया, लाओस और म्यांमार जैसे देशों में सक्रिय अन्य साइबर गिरोहों में भी हड़कंप मच गया है।
साइबर क्राइम का बदलता स्वरूप
चीन की इस कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर ‘साइबर गुलामी’ (Cyber Slavery) के मुद्दे को उजागर किया है। अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां (Interpol) भी इस मॉडल का अध्ययन कर रही हैं ताकि कंबोडिया और फिलीपींस जैसे देशों में चल रहे ऐसे ही अवैध केंद्रों पर लगाम लगाई जा सके।
“यह सजा उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो मानव गरिमा और कानून का उल्लंघन करते हैं। हमारी सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सीमाओं की परवाह किए बिना न्याय सुनिश्चित करेगी।” — प्रवक्ता, चीनी विदेश मंत्रालय





