नई दिल्ली। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी चार धाम ऑल वेदर रोड परियोजना एक बार फिर कानूनी जटिलताओं में घिर गई है। पर्यावरणीय और भौगोलिक असंतुलन को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। देश की 57 जानी-मानी हस्तियों ने संयुक्त रूप से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर परियोजना पर गहन समीक्षा की मांग की है।
प्रकृति और सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
इन हस्तियों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। यहां बड़े पैमाने पर सड़क चौड़ीकरण और निर्माण गतिविधियां न केवल पारिस्थितिकी के लिए खतरा हैं, बल्कि हजारों लोगों की जानमाल को भी जोखिम में डाल सकती हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि हाल के वर्षों में उत्तराखंड में आई आपदाओं और भूस्खलनों का सीधा संबंध अवैज्ञानिक विकास मॉडल से है। ऐसे में चार धाम परियोजना पर बिना पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के आगे बढ़ना खतरनाक साबित हो सकता है।
पहले भी उठ चुकी हैं आपत्तियां
चार धाम परियोजना की शुरुआत से ही इसे लेकर विवाद जारी है। 900 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का निर्माण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए किया जा रहा है, ताकि सालभर बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री तक आवागमन सुगम रहे। लेकिन पर्यावरणविद लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि चौड़ीकरण और भारी मशीनों के इस्तेमाल से पर्वतीय ढलानों पर दबाव बढ़ रहा है।
सरकार का पक्ष
केंद्र और राज्य सरकार का कहना है कि यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम है। चीन सीमा तक तेजी से पहुंच बनाने और आपात स्थिति में सेना की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए चौड़ी सड़कें जरूरी हैं। सरकार ने दावा किया है कि निर्माण के दौरान पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा उपायों का पालन किया जा रहा है।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका पर जल्द ही सुनवाई हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधने की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है। जहां एक ओर परियोजना को धार्मिक और सामरिक दृष्टि से अनिवार्य बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणविद हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाने के लिए इसे सीमित दायरे में रखने की मांग कर रहे हैं।





