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चंद्रशेखर आजाद के काफिले को रोकने पर भड़का आक्रोश

भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई न होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

हल्द्वानी। गोंडा में निषाद समाज के विनोद साहनी की हत्या के बाद पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के काफिले को बाराबंकी में रोके जाने का मामला अब नैनीताल तक पहुंच गया है। भीम आर्मी भारत एकता मिशन और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की नैनीताल इकाई ने घटना के विरोध में उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

संगठन का आरोप है कि 13 सितंबर को चंद्रशेखर आजाद लखनऊ से गोंडा जा रहे थे। बाराबंकी में शहाबपुर टोल, मसौली और रामनगर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका काफिला रोक दिया। इस दौरान पहले से मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने काफिले पर जूता फेंकने, नारेबाजी और कार्यकर्ताओं से धक्का-मुक्की की। विरोध में सांसद को डाक बंगले के सामने करीब दो घंटे धरने पर बैठना पड़ा।

संगठन ने सवाल उठाया कि जब निर्वाचित सांसद की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो आम दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्ग के लोगों की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी?

तीन प्रमुख मांगें रखीं

ज्ञापन में बाराबंकी में काफिला रोकने और कथित हमले के मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों व असामाजिक तत्वों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की गई। इसके अलावा गोंडा में विनोद साहनी हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा और सुरक्षा देने की मांग उठाई गई।

संगठन ने सांसद चंद्रशेखर आजाद को जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन कार्यक्रम में नफीस अहमद खान, सुरेश चंद्र बेरी, सिराज अहमद, जीतराम, अनवर अंसारी, मोइन खान, आफताब आलम, नादिर सैफी, इरशाद हुसैन, सुलैमान मलिक, बालकिशन, नवीन मूलनिवासी, रिजवान गुड्डू, इरशाद बेग, पीआर टम्टा, आरपी गंगोला समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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