नई दिल्ली: भारत के तेजी से बढ़ते घरेलू विमानन बाज़ार (Domestic Aviation Market) पर निजी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) और टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया (Air India) ग्रुप का लगभग पूर्ण कब्ज़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह चौंकाने वाली जानकारी दी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन दोनों प्रमुख एयरलाइंस की घरेलू बाज़ार में संयुक्त हिस्सेदारी 91 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह स्थिति बाज़ार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Competition) की कमी और मुसाफिरों के लिए सीमित विकल्पों को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करती है।
सागरिका घोष के सवाल पर मंत्रालय का खुलासा: इंडिगो 64%, एअर इंडिया ग्रुप 27%
यह महत्त्वपूर्ण जानकारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सागरिका घोष द्वारा नागरिक उड्डयन मंत्रालय से पूछे गए एक तीखे प्रश्न के उत्तर में सामने आई। सदन में सोमवार को नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इस संबंध में विस्तृत जवाब दाखिल किया। मंत्री मोहोल ने बताया कि विमानन नियामक संस्था ‘नागरिक उड्डयन महानिदेशालय’ (DGCA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में M/s इंडिगो की बाज़ार हिस्सेदारी लगभग 64.0 प्रतिशत है। वहीं, दूसरी ओर, एअर इंडिया समूह (जिसमें एअर इंडिया, एअर इंडिया एक्सप्रेस और एआईएक्स कनेक्ट शामिल हैं) की हिस्सेदारी 27.0 प्रतिशत दर्ज की गई है।
‘डिओपोली’ की ओर बढ़ता बाज़ार: हजारों उड़ानों के रद्द होने से मुसाफिर बेहाल
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अपने जवाब में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि ये दोनों एयरलाइंस मिलकर घरेलू बाज़ार का 91 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखती हैं। यह स्थिति देश के विमानन क्षेत्र में दो कंपनियों के वर्चस्व (डिओपोली – Duopoly) की ओर इशारा करती है, जो किराया नीति और सेवा की गुणवत्ता पर सीधा असर डाल सकती है। वहीं, दूसरी ओर, संसद में यह भी जानकारी दी गई कि पिछले एक वर्ष के दौरान तकनीकी कारणों, मौसम की खराबी और परिचालन संबंधी समस्याओं के चलते हजारों घरेलू उड़ानों को रद्द करना पड़ा है। सरकार ने बताया कि ‘पांच हजार से ज्यादा उड़ाने रद्द की गईं’, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए और उन्हें भारी मानसिक व आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रतिस्पर्धा की कमी और भविष्य की चुनौतियाँ: विमानन क्षेत्र पर असर
भारतीय विमानन बाज़ार में इंडिगो और एअर इंडिया का यह बढ़ता दबदबा अन्य छोटी एयरलाइंस (जैसे अकासा एअर, स्पाइसजेट) के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाज़ार में प्रतिस्पर्धा कम होने से हवाई किराए में बढ़ोतरी हो सकती है और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ मिलने में कठिनाई हो सकती है। सरकार को इस दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि बाज़ार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और यात्रियों के हितों की रक्षा हो सके। संसद में पेश किए गए ये आंकड़े भारत के विमानन क्षेत्र के भविष्य और नियामक ढांचे (Regulatory Framework) को लेकर एक व्यापक बहस को जन्म दे सकते हैं।





