Saturday, January 31, 2026

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ग्रीनलैंड मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी में दरार: ट्रंप के ‘कब्जे’ वाले विचार पर अपनी ही पार्टी के सांसदों ने उठाए सवाल; बोले- ‘यह 19वीं सदी नहीं, संप्रभुता का सम्मान करें’

वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की इच्छा जताने के मुद्दे पर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर दो फाड़ हो गए हैं। जहां ट्रंप के वफादार सांसद इसे सामरिक दृष्टि से ‘मास्टरस्ट्रोक’ मान रहे हैं, वहीं पार्टी के कई कद्दावर और उदारवादी सांसदों ने इस विचार को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के खिलाफ बताते हुए इसके विरोध में आवाज उठाई है। विरोध कर रहे सांसदों का तर्क है कि इस तरह के बयानों से न केवल डेनमार्क जैसे करीबी नाटो (NATO) सहयोगी के साथ संबंध खराब हो रहे हैं, बल्कि इससे अमेरिका की छवि एक ‘साम्राज्यवादी’ शक्ति के रूप में बन रही है। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर उठा यह वैचारिक मतभेद आने वाले राष्ट्रपति चुनाव और अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है।

रिपब्लिकन सांसदों के विरोध के मुख्य बिंदु

ट्रंप विरोधी खेमे के रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी नाराजगी के पीछे कई अहम कारण गिनाए हैं:

  • संप्रभुता का अपमान: कई वरिष्ठ सांसदों का मानना है कि ग्रीनलैंड कोई बिकाऊ संपत्ति नहीं है, बल्कि डेनमार्क के साम्राज्य के तहत एक स्वायत्त क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में किसी देश के हिस्से को ‘खरीदने’ की बात करना कूटनीतिक रूप से अपरिपक्वता है।
  • गठबंधन को खतरा: सांसदों को डर है कि इस जिद के कारण आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के खिलाफ बने पश्चिमी देशों के गठबंधन में दरार आ सकती है। डेनमार्क ने पहले ही इस प्रस्ताव को ‘हास्यास्पद’ करार दिया है।
  • वित्तीय बोझ: कुछ सांसदों ने सवाल उठाया है कि ग्रीनलैंड के प्रशासन और वहां के बुनियादी ढांचे पर होने वाला अरबों डॉलर का खर्च अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।

क्यों ग्रीनलैंड पर टिकी है ट्रंप की नजर?

विवाद के बावजूद, ट्रंप और उनके समर्थकों के पास इस द्वीप को लेकर अपने ठोस तर्क हैं:

  1. सामरिक स्थान: ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जो रूस और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  2. प्राकृतिक संसाधन: इस द्वीप पर कोयला, लोहा, जस्ता और दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals) के विशाल भंडार होने की संभावना है, जो भविष्य की तकनीक के लिए जरूरी हैं।
  3. थुले एयर बेस: अमेरिका का वहां पहले से ही एक महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना (Pituffik Space Base) मौजूद है, जिसे ट्रंप और अधिक विस्तार देना चाहते हैं।

पार्टी के भीतर बढ़ता तनाव

रिपब्लिकन पार्टी में इस मुद्दे को लेकर दो गुट साफ नजर आ रहे हैं:

  • ट्रंप गुट: यह गुट ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति के तहत इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रहा है और सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड के ऊपर ट्रंप टावर वाली तस्वीरें साझा कर इसे हवा दे रहा है।
  • संस्थागत गुट (Establishment): यह गुट इसे एक ‘गैर-जरूरी विवाद’ मान रहा है जो मुख्य चुनावी मुद्दों (जैसे महंगाई और आव्रजन) से ध्यान भटका सकता है।

निष्कर्ष: कूटनीतिक मुश्किलों का दौर

ग्रीनलैंड के मुद्दे ने यह साफ कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां अब उनकी अपनी ही पार्टी के लिए परीक्षा की घड़ी बन गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह विरोध और बढ़ता है, तो विदेशी मंचों पर अमेरिका की साख को धक्का लग सकता है। फिलहाल, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें इस चर्चा को पूरी तरह खारिज कर चुकी हैं, लेकिन अमेरिकी राजनीति में यह ‘कोल्ड वॉर’ थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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