नई दिल्ली। गोवा में कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए आठ विधायकों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत ने गोवा विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका को खारिज कर दिया गया था।
यह मामला वर्ष 2022 में कांग्रेस के आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने से जुड़ा है। कांग्रेस नेता गिरीश चोडनकर ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधायकों का दल-बदल संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के प्रावधानों के तहत अयोग्यता के दायरे में आता है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहन शामिल हैं, ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई है कि विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय कानूनी प्रावधानों और दल-बदल विरोधी कानून की भावना के अनुरूप नहीं है।
गोवा विधानसभा अध्यक्ष रमेश तवड़कर ने इससे पहले आठ कांग्रेस विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिका को खारिज कर दिया था। अध्यक्ष ने अपने आदेश में कहा था कि विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले। इस फैसले को कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मामले का संबंध राजनीतिक दल बदल और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही से जुड़ा है। दल-बदल विरोधी कानून का उद्देश्य निर्वाचित सदस्यों के पार्टी बदलने पर रोक लगाना और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय की न्यायिक समीक्षा किस दिशा में आगे बढ़ती है।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस मामले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश के कई राज्यों में विधायकों के दल बदल और उनकी अयोग्यता से जुड़े विवाद समय-समय पर अदालतों तक पहुंचे हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर भविष्य के ऐसे मामलों पर भी पड़ सकता है।





