नई दिल्ली/कोच्चि: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के सबसे बड़े गोल्ड स्मगलिंग सिंडिकेट में से एक के खिलाफ अदालत में अपनी पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में ‘रान्य राव’ और उसके नेटवर्क के काम करने के तौर-तरीकों (Modus Operandi) को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, यह रैकेट केवल सोने की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय हवाला ऑपरेटरों और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों से भी जुड़े थे। चार्जशीट में स्पष्ट किया गया है कि रान्य राव इस पूरे धंधे की मुख्य कड़ी था, जो विदेशों से आने वाले सोने को सुरक्षित ठिकानों तक पहुँचाने के बदले भारी-भरकम कमीशन वसूलता था।
स्मगलिंग का ‘कॉर्पोरेट’ मॉडल: कैसे चलता था धंधा?
ED की जांच में सामने आया है कि स्मगलिंग का यह धंधा किसी कंपनी की तरह सुव्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था:
- विदेशों से खरीद: दुबई और अन्य खाड़ी देशों से सोना अवैध तरीके से खरीदा जाता था।
- छिपने के नए तरीके: सोने को इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, कपड़ों की तहों और यहाँ तक कि पेस्ट के रूप में मानव शरीर के भीतर छिपाकर हवाई अड्डों के जरिए भारत लाया जाता था।
- हवाई अड्डा ‘मैनेजमेंट’: चार्जशीट के अनुसार, रान्य राव का नेटवर्क हवाई अड्डे के कुछ निचले स्तर के अधिकारियों और ग्राउंड स्टाफ के संपर्क में था, जो सुरक्षा जांच से बचने में मदद करते थे।
रान्य राव का कमीशन: करोड़ों की काली कमाई
चार्जशीट में रान्य राव को मिलने वाले कमीशन का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है, जो किसी के भी होश उड़ा सकता है:
- प्रति किलो रेट: जांच के मुताबिक, रान्य राव को प्रत्येक एक किलोग्राम सोने की सफल डिलीवरी पर 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का कमीशन मिलता था।
- हवाला के जरिए भुगतान: स्मगलिंग से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा रान्य राव तक ‘हवाला’ चैनलों के जरिए पहुँचता था, ताकि बैंकिंग सिस्टम की नजरों से बचा जा सके।
- संपत्ति में निवेश: रान्य ने इस काली कमाई का इस्तेमाल बेनामी संपत्तियों, आलीशान होटलों और विदेशी खातों में निवेश करने के लिए किया, जिन्हें अब ED ने चिन्हित कर लिया है।
ED की चार्जशीट के मुख्य बिंदु
प्रवर्तन निदेशालय ने पुख्ता सबूतों के साथ रान्य राव की घेराबंदी की है:
- व्हाट्सएप चैट्स और कोडवर्ड: जांच एजेंसी ने रान्य के फोन से कई डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट रिकवर किए हैं, जिनमें ‘पीला बिस्किट’ और ‘पार्सल’ जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया था।
- लॉजिस्टिक्स का जिम्मा: रान्य राव केवल पैसा नहीं लेता था, बल्कि वह कूरियर (Mules) की व्यवस्था करने और उनके पकड़े जाने पर उनके परिवारों को आर्थिक मदद देने का ‘बीमा’ भी संभालता था।
- विदेशी कनेक्शन: चार्जशीट में दुबई स्थित कुछ बड़े ज्वेलर्स का भी जिक्र है जो इस सिंडिकेट को कच्चे माल की आपूर्ति कर रहे थे।





