देहरादून: उत्तराखंड के खेल इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराने वाले खिलाड़ियों के लिए आज का दिन गर्व और चिंता दोनों का विषय बना हुआ है। 38वें राष्ट्रीय खेलों (National Games) में उत्तराखंड के जांबाज खिलाड़ियों ने कुल 130 पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया था, लेकिन विडंबना यह है कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के एक साल बीत जाने के बाद भी पदक विजेता खिलाड़ी सरकारी नौकरी के लिए भटक रहे हैं।
उपलब्धि बड़ी, पर वादे अधूरे
- ऐतिहासिक प्रदर्शन: पिछले वर्ष आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 130 पदकों (स्वर्ण, रजत और कांस्य) का अंबार लगा दिया था। यह राज्य के खेल इतिहास का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
- सरकार का वादा: खेलों के समापन पर राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि सभी पदक विजेताओं को ‘आउट ऑफ टर्न’ (बिना किसी देरी के) सरकारी नौकरी दी जाएगी। इसमें स्वर्ण पदक विजेताओं को ग्रेड-पे 4200 और अन्य पदक विजेताओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार देने का प्रावधान किया गया था।
- फाइलों में अटका भविष्य: एक साल बीत जाने के बाद भी नियुक्ति की प्रक्रिया प्रशासनिक फाइलों और नियमों के जाल में उलझी हुई है। कई खिलाड़ी वर्तमान में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और भविष्य की चिंता में प्रैक्टिस पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
खेल मंत्री का रुख और खिलाड़ियों की मांग
इस मुद्दे पर बढ़ते दबाव के बीच, खेल मंत्री रेखा आर्या ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नियुक्ति की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। हालांकि, खिलाड़ियों का कहना है कि अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
- खिलाड़ियों की व्यथा: “हमने अपना खून-पसीना बहाकर राज्य को शीर्ष पर पहुँचाया, लेकिन आज हमें अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।”
- अधिकारियों का तर्क: विभाग का कहना है कि नियमावली में कुछ तकनीकी संशोधनों और विभागों में पदों की उपलब्धता की जांच के कारण प्रक्रिया में समय लग रहा है।
क्या है ‘आउट ऑफ टर्न’ नियुक्ति का नियम?
उत्तराखंड सरकार ने ओलंपिक, एशियाई खेल और राष्ट्रीय खेलों के विजेताओं के लिए विशेष खेल कोटा निर्धारित किया है। इसके तहत पदक विजेताओं को सीधे राजपत्रित और अराजपत्रित पदों पर नियुक्ति दी जानी है। 130 पदकों में से टीम इवेंट और व्यक्तिगत स्पर्धाओं के सभी विजेताओं को इस नीति का लाभ मिलना तय है।
नोट: उत्तराखंड की खेल नीति 2021 के तहत खिलाड़ियों को आर्थिक प्रोत्साहन के साथ-साथ रोजगार की गारंटी दी गई थी, जिसे लागू करने में हो रही देरी से अब खिलाड़ियों का धैर्य जवाब दे रहा है।





