तेहरान/दुबई। मध्य पूर्व के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रहा है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के खिलाफ जनता का आक्रोश चरम पर पहुँच गया है। सड़कों पर उतरते प्रदर्शनकारियों और वैश्विक दबाव के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान में तख्तापलट की स्थिति बन रही है? जानकारों के अनुसार, इस समय चार प्रमुख ताकतें ऐसी हैं जो खामेनेई के ‘इस्लामिक शासन’ की नींव हिलाने के लिए एकजुट खड़ी नजर आ रही हैं।
1. युवाओं और महिलाओं का ऐतिहासिक विद्रोह
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, जो अब धार्मिक पाबंदियों और दमनकारी नीतियों के खिलाफ आर-पार की जंग लड़ रही है। हिजाब विवाद से शुरू हुआ आंदोलन अब ‘आजादी’ की व्यापक मांग में बदल चुका है। ईरान की महिलाएं और छात्र अब केवल सुधार नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं। प्रदर्शनों के दौरान ‘तानाशाह को मौत’ जैसे नारों ने शासन को बैकफुट पर धकेल दिया है।
2. चरमराती अर्थव्यवस्था और महंगाई
ईरान की जनता के गुस्से का एक बड़ा कारण कमरतोड़ महंगाई और बेरोजगारी है। सालों से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की कीमत लगातार गिर रही है। बुनियादी सुविधाओं की किल्लत ने आम नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। जब पेट खाली होता है, तो विद्रोह की आग सबसे तेज भड़कती है, और यही आर्थिक बदहाली खामेनेई के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है।
3. सैन्य और सुरक्षा बलों के भीतर फूट की सुगबुगाहट
किसी भी तख्तापलट की संभावना तब प्रबल होती है जब देश की सेना या सुरक्षा बल शासन का साथ छोड़ दें। खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की नियमित सेना और शक्तिशाली ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) के निचले स्तर के अधिकारियों के बीच असंतोष पनप रहा है। अपने ही देश के नागरिकों पर गोली चलाने के आदेश ने सुरक्षा बलों के भीतर नैतिक संकट खड़ा कर दिया है। यदि सुरक्षा बलों का एक बड़ा हिस्सा विद्रोहियों के साथ मिलता है, तो तख्तापलट को रोकना असंभव होगा।
4. निर्वासन में विपक्षी नेता और विदेशी दबाव
ईरान के बाहर रह रहे विपक्षी गुट और राजशाही के समर्थक अब पहले से कहीं अधिक संगठित हैं। वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खामेनेई सरकार को अलग-थलग करने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। साथ ही, इजरायल और अमेरिका जैसे देशों का कड़ा रुख और ईरान के भीतर हो रही संदिग्ध साइबर और सैन्य घटनाएं इस शासन को कमजोर कर रही हैं। विपक्षी ताकतों का बढ़ता प्रभाव जनता को एक वैकल्पिक नेतृत्व की उम्मीद दे रहा है।
क्या कहता है भविष्य?
ईरान का इतिहास गवाह है कि 1979 की क्रांति ने भी इसी तरह के जन-आंदोलन से सत्ता बदली थी। हालांकि, खामेनेई प्रशासन अब भी लोहे के हाथ से विद्रोह को कुचलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन जिस तरह से समाज के हर वर्ग—मजदूरों से लेकर व्यापारियों तक—ने इस विद्रोह को समर्थन दिया है, वह संकेत दे रहा है कि ईरान के ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ के लिए आने वाले दिन अस्तित्व की लड़ाई साबित हो सकते हैं।




