कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता मंगलवार को हुई भीषण बारिश से तबाह हो गई। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, शहर और आसपास के इलाकों में 24 घंटे में 251.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिसने पिछले 40 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 1986 के बाद पहली बार कोलकाता ने इतनी मूसलधार बारिश देखी है।
भारी बारिश से शहर के अधिकांश इलाके—सॉल्ट लेक, उत्तरी और मध्य कोलकाता—अब भी पानी में डूबे हुए हैं। सड़कों ने नदियों का रूप ले लिया है। यातायात ठप है, मेट्रो और रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि हवाई उड़ानें भी देरी से संचालित हो रही हैं।
जनहानि और नुकसान
इस आपदा में कम से कम 10 लोगों की जान गई, जिनमें से 9 की मौत बिजली के करंट लगने से हुई। हजारों लोग बारिश और जलभराव से प्रभावित हैं। स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद करने पड़े हैं। वहीं, राज्य सरकार ने सुरक्षा के मद्देनज़र दुर्गा पूजा की छुट्टियां पहले ही घोषित कर दीं ताकि लोग घरों में सुरक्षित रह सकें।
सीएम ममता का एलान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को हालात की समीक्षा की और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया।
उन्होंने कहा—
“हम जानते हैं कि पैसे से जान की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन यह छोटी-सी मदद है।”
• मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
• यदि कोलकाता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉरपोरेशन (CESC) मृतकों के परिजनों को नौकरी नहीं देता, तो राज्य सरकार विशेष रोजगार उपलब्ध कराएगी।
• ममता ने CESC से अपील की कि वह करंट से मारे गए लोगों के परिवारों को 5 लाख रुपये का मुआवजा दे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस आपदा पर संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं मृतकों के परिवारों और प्रभावित लोगों के साथ हैं। साथ ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे राहत कार्यों में जुटें। राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य सरकारों से जल्द से जल्द राहत व पुनर्वास कार्य तेज करने की मांग की।
त्योहारों से पहले तबाही
भारी बारिश और जलभराव ने कोलकाता की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। दुर्गा पूजा से पहले शहर में यह आपदा भयावह स्थिति लेकर आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अब तक करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है और हालात सामान्य होने में वक्त लग सकता है।





