पिथौरागढ़/नई दिल्ली: विश्व प्रसिद्ध कैलास मानसरोवर यात्रा के आगामी सीजन को लेकर शिव भक्तों और यात्रा से जुड़े महकमों के बीच बेचैनी बढ़ती जा रही है। यात्रा की तैयारियों को लेकर प्रतिवर्ष होने वाली उच्चस्तरीय समन्वय बैठक की तिथि अभी तक तय नहीं हो पाई है, जिससे आयोजन को लेकर ‘सस्पेंस’ की स्थिति बनी हुई है। उत्तराखंड के सीमावर्ती जनपद पिथौरागढ़ से होकर गुजरने वाली इस यात्रा के भविष्य पर अभी सन्नाटा पसरा है। कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) और जिला प्रशासन को अब विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक आदेश और बैठक की सूचना का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि यात्रा के रूट की मरम्मत और आवास व्यवस्थाओं के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है।
तैयारियों का समय निकला जा रहा: प्रशासन की बढ़ी चिंता
कैलास यात्रा के सफल संचालन के लिए महीनों पहले से तैयारी शुरू करनी पड़ती है:
- रूट की स्थिति: धारचूला से लिपुलेख दर्रे तक जाने वाले पैदल और सड़क मार्ग की स्थिति की समीक्षा करना जरूरी है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के बाद रास्तों को दुरुस्त करने के लिए बीआरओ (BRO) को समय चाहिए होता है।
- आवास और रसद: सिरखा, गाला, और बूंदी जैसे पड़ावों पर बने यात्री कैंपों के नवीनीकरण और वहां राशन पहुँचाने की प्रक्रिया में काफी समय लगता है।
- लॉजिस्टिक चुनौतियां: यात्रा की सुरक्षा और संचार के लिए आईटीबीपी (ITBP) और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय बैठकें होनी अभी बाकी हैं।
सस्पेंस का मुख्य कारण: कूटनीतिक और तकनीकी चुनौतियां
यात्रा की बैठक टलने या तिथि तय न होने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं:
- चीन के साथ कूटनीतिक रुख: चूंकि यात्रा तिब्बत (चीन) के क्षेत्र में होती है, इसलिए विदेश मंत्रालय को चीनी अधिकारियों के साथ वीजा और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर अंतिम सहमति बनानी होती है।
- नई आधारभूत संरचना: लिपुलेख तक सड़क मार्ग बनने के बाद यात्रा के स्वरूप में बदलाव (पैदल के बजाय वाहन से) को लेकर नए नियमों पर चर्चा होनी है।
- नोडल एजेंसी का इंतजार: यात्रा की मुख्य नोडल एजेंसी ‘कुमाऊं मंडल विकास निगम’ को अभी तक केंद्र सरकार से बजट या तैयारियों को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।
श्रद्धालुओं का इंतजार: हजारों आवेदन अटके
देशभर के हजारों श्रद्धालु जो हर साल कैलास-मानसरोवर के दर्शन की इच्छा रखते हैं, वे मंत्रालय की वेबसाइट पर पंजीकरण शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं:
- पंजीकरण में देरी: आम तौर पर फरवरी-मार्च तक पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार अप्रैल का महीना नजदीक आने के बावजूद पोर्टल सक्रिय नहीं हुआ है।
- निजी ऑपरेटरों का दखल: आधिकारिक यात्रा पर संशय के कारण कई श्रद्धालु नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों के जरिए जाने पर विचार कर रहे हैं, जो काफी महंगा और जोखिम भरा होता है।





