नैनीताल/भवाली: विश्व विख्यात बाबा नीम करौली महाराज की तपोस्थली ‘कैंची धाम’ में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों पर संज्ञान लेते हुए नैनीताल हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने उत्तराखंड सरकार और कैंची धाम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि मंदिर में आने वाले भारी-भरकम चढ़ावे का हिसाब-किताब किस प्रकार रखा जा रहा है और क्या इसके प्रबंधन के लिए कोई पारदर्शी नीति मौजूद है।
क्या हैं गंभीर आरोप? क्यों उठा घोटाले का मुद्दा?
यह कानूनी कार्रवाई एक स्थानीय निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के आधार पर शुरू हुई है, जिसमें निम्नलिखित बिंदु उठाए गए हैं:
- वित्तीय पारदर्शिता का अभाव: याचिकाकर्ता का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर विराट कोहली और मार्क जुकरबर्ग जैसी हस्तियों के आगमन के बाद, मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और दान में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, लेकिन इस राशि का कोई ऑडिट नहीं किया गया है।
- करोड़ों की हेराफेरी की आशंका: आरोप है कि मंदिर को मिलने वाले नकद चढ़ावे और ऑनलाइन दान में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, जिससे करोड़ों रुपये के गबन की आशंका है।
- अवैध निर्माण और कुप्रबंधन: याचिका में यह भी कहा गया है कि दान की राशि का उपयोग मंदिर के वास्तविक उद्देश्यों के बजाय निजी हितों या अनधिकृत निर्माणों में किया जा रहा है।
नैनीताल हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए:
- सरकार को निर्देश: कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या वह मंदिर के प्रबंधन को अपने हाथ में लेने या इसके लिए एक श्राइन बोर्ड (Shrine Board) गठित करने पर विचार कर रही है।
- ट्रस्ट से हिसाब तलब: मंदिर ट्रस्ट को आदेश दिया गया है कि वह पिछले कुछ वर्षों के आय-व्यय का पूर्ण विवरण और ऑडिट रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।
- अगली सुनवाई: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि जल्द तय की है और तब तक सभी पक्षों को अपने हलफनामे दाखिल करने को कहा है।
श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की साख पर आंच
कैंची धाम केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है:
- बढ़ती लोकप्रियता: नीम करौली बाबा के इस आश्रम में हर साल लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण यहां भीड़ और दान में भारी उछाल आया है।
- भक्तों में रोष: घोटाले की खबर सामने आने के बाद बाबा के भक्तों में गहरा असंतोष है। श्रद्धालुओं की मांग है कि बाबा के नाम पर आने वाला एक-एक पैसा जनकल्याण और मंदिर की सुविधाओं में खर्च होना चाहिए।





