तिरुवनंतपुरम। केरल के पूर्व राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर ने पद छोड़ने से पहले राष्ट्रपति को पत्र लिखकर केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के अध्यक्ष एम.आर. बैजू और आयोग के सदस्यों को पद से हटाने की मांग की है। उन्होंने आयोग के कामकाज की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी सिफारिश की है।
भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का मामला
यह कदम राज्य योजना बोर्ड और लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद उठाया गया है। इन मामलों की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। हालांकि, आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के जांच टीम के सामने पेश नहीं होने के कारण जांच प्रभावित होने की बात सामने आई है।
केरल हाई कोर्ट ने भी मामले की धीमी जांच पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने सरकार और विपक्ष के बीच कथित मिलीभगत को लेकर सवाल उठाए थे।
शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश
आर्लेकर के कार्यकाल के दौरान युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। पूर्व राज्यपाल ने आंतरिक सतर्कता शाखा और पुलिस की जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद राष्ट्रपति को पत्र भेजा।
बताया गया है कि केरल के इतिहास में यह पहला ऐसा मामला है, जब किसी राज्यपाल ने लोक सेवा आयोग के शीर्ष नेतृत्व को हटाने और आयोग के कामकाज की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए सीधे राष्ट्रपति से मांग की है।
अनुच्छेद 317 के तहत होगी कार्रवाई
संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया निर्धारित है। राज्य सरकार या राज्यपाल उन्हें सीधे पद से नहीं हटा सकते। कदाचार के आरोपों पर राष्ट्रपति मामले को जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट भेज सकते हैं। अदालत की जांच और सिफारिश के आधार पर ही हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
आर्लेकर ने केरल के राज्यपाल का पद छोड़ने से ठीक पहले यह पत्र भेजा था। उनके स्थान पर ओम प्रकाश माथुर ने केरल के नए राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला।




